नई दिल्ली। पड़ोसी देश नेपाल में हाल ही में आई भीषण फ्लैश फ्लड (अचानक आई बाढ़) के कारण बिजली उत्पादन में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। संकट से निपटने के लिए नेपाल सरकार ने भारत से सितंबर 2026 से ही अतिरिक्त बिजली की आपूर्ति (Advance Electricity Approvals) शुरू करने का अनुरोध किया है। आमतौर पर भारत सर्दियों के मौसम में नेपाल को बिजली का निर्यात करता है, लेकिन प्राकृतिक आपदा के कारण नेपाल ने इसे समय से पहले शुरू करने की मांग की है।
भारतीय केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार, भारत सरकार नेपाल की अतिरिक्त बिजली जरूरतों को पूरा करने के लिए तैयार है और संबंधित प्राधिकरण इन औपचारिक अनुरोधों को प्रक्रिया में ला रहे हैं।
त्रिशूली नदी में तबाही से 550 MW का नुकसान
बीते 26 अगस्त को नेपाल की त्रिशूली/ल्हांदे खोला (Trishuli/Lhende Khola) नदी बेसिन में आई विनाशकारी बाढ़ ने वहां के स्थानीय इंफ्रास्ट्रक्चर और प्रमुख हाइड्रोपावर प्लांटों को गंभीर नुकसान पहुंचाया है।
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उत्पादन में गिरावट: शुरुआती आकलन के अनुसार नेपाल की घरेलू जलविद्युत उत्पादन क्षमता में करीब 550 मेगावाट (MW) की कमी आई है।
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भारत को सप्लाई घटी: इस नुकसान की वजह से नेपाल से भारत को होने वाला क्रॉस-बॉर्डर पावर फ्लो भी घटकर 400 MW रह गया है, जो पहले 950-1,000 MW के पीक लेवल पर था।⚡ भारतीय ग्रिड सुरक्षित, 1400 MW तक बढ़ेगी क्षमता
भारतीय अधिकारियों ने साफ किया है कि नेपाल में हुए इस नुकसान का भारत के राष्ट्रीय बिजली ग्रिड (National Power Grid) पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा और स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है।
ऊर्जा मंत्रालय के अधिकारी ने बताया:
“भारत की ढालकेबर-मुजफ्फरपुर (Dhalkebar-Muzaffarpur) 400 kV क्रॉस-बॉर्डर ट्रांसमिशन लाइन पूरी तरह चालू है, जिसकी क्षमता 1,000 मेगावाट है। भारत की विशाल ग्रिड क्षमता और मजबूत जनरेशन रिजर्व के कारण 400 MW की इस अस्थायी कमी को बिना किसी रुकावट के आसानी से संभाला जा सकता है।”
गौरतलब है कि भारत और नेपाल गर्मियों में नेपाल से हाइड्रोपावर (जलविद्युत) आयात करते हैं और शुष्क सर्दियों में नेपाल को बिजली का निर्यात करते हैं। दोनों देशों ने हाल ही में ट्रांसमिशन लाइन की क्षमता को 1,000 MW से बढ़ाकर 1,400 MW से अधिक करने पर सहमति जताई है।
