Bilaspur News: बाउंड्रीवाल से बंद हुआ मुक्तिधाम का रास्ता, शव ले जाने में आई अड़चन; प्रशासन ने खुलवाया रास्ता

Chhattisgarh Bilaspur News :बिलासपुर । ग्राम पंचायत डोमनपुर में मुक्तिधाम तक पहुंचने वाले रास्ते को लेकर विवाद सामने आया है। निजी जमीन पर बाउंड्रीवाल किए जाने के कारण ग्रामीणों को शव को मुक्तिधाम तक ले जाने में परेशानी का सामना करना पड़ा। रास्ता बाधित होने की सूचना मिलने पर ग्रामीणों ने तहसीलदार और थाना प्रभारी से मदद की गुहार लगाई। इसके बाद तहसीलदार शशांक शेखर शुक्ला, नायब तहसीलदार और थाना प्रभारी मौके पर पहुंचे। दोनों पक्षों से चर्चा के बाद तत्काल रास्ता खुलवाया गया और शव को मुक्तिधाम पहुंचाकर अंतिम संस्कार कराया गया।

ग्राम पंचायत के सरपंच प्रतिनिधि विजय जायसवाल ने बताया कि मुक्तिधाम तक जाने वाले रास्ते का ग्रामीण करीब 100 वर्षों से निस्तारी और अंतिम संस्कार के लिए उपयोग करते आ रहे हैं। उनका आरोप है कि रास्ते पर बार-बार कब्जा कर बाउंड्रीवाल कर दी जाती है, जिससे गांव में किसी की मृत्यु होने पर शव को मुक्तिधाम तक ले जाने में परेशानी होती है। ग्रामीणों ने रास्ते को स्थायी रूप से निस्तारी के लिए खुला रखने की मांग की है।

तहसीलदार शशांक शेखर शुक्ला के अनुसार मुक्तिधाम से लगी जमीन निजी है। ग्रामीण लंबे समय से निजी जमीन से लगी परंपरागत मेड़ के रास्ते से शव को मुक्तिधाम तक ले जाते रहे हैं। भूमि स्वामी की ओर से रास्ता बाधित कर बाउंड्रीवाल किए जाने के बाद अंतिम संस्कार के लिए शव ले जाने में समस्या उत्पन्न हुई। प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर दोनों पक्षों से बातचीत की और तत्काल आवागमन के लिए रास्ता उपलब्ध कराया।

वहीं निजी जमीन के मालिक हितेश चंद्राकर ने प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि जमीन उनकी निजी संपत्ति है और पूर्व में उनके खिलाफ बेजा कब्जा संबंधी मामला चला था, जिसमें वे जीत चुके हैं। उनका आरोप है कि बिना पूर्व सूचना के ग्रामीणों और प्रशासनिक अमले ने उनकी जमीन की बाउंड्रीवाल तोड़कर रास्ता बना दिया। उन्होंने मामले में नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है।

प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद तत्काल रास्ता खुलने से शव को मुक्तिधाम पहुंचाकर अंतिम संस्कार कराया जा सका, लेकिन निजी जमीन से होकर मुक्तिधाम तक जाने वाले रास्ते को लेकर विवाद अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। ग्रामीणों की मांग है कि इस मामले का स्थायी समाधान किया जाए, ताकि भविष्य में किसी की मृत्यु होने पर शव को मुक्तिधाम तक ले जाने में ऐसी स्थिति दोबारा न बने।

शेयर करें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *