LLB Exam Carelessness : बालोद के अग्रणी कॉलेज में LLB 2nd सेमेस्टर की परीक्षा में बांटा गया गलत प्रश्नपत्र। छात्राओं की सूझबूझ से पकड़ाया ब्लंडर

(LLB Exam Carelessness

बालोद। एक तरफ जहां देश में राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं की शुचिता और गोपनीयता को लेकर युवाओं में भारी आक्रोश है, वहीं छत्तीसगढ़ के बालोद जिले से परीक्षा प्रणाली में एक बड़ी और गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है। जिले के प्रतिष्ठित घनश्याम सिंह गुप्त अग्रणी महाविद्यालय में परीक्षा प्रबंधन की घोर लापरवाही के चलते एलएलबी (LLB) द्वितीय सेमेस्टर के विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने की कोशिश की गई, जहाँ परीक्षा हॉल में छात्रों को गलत प्रश्नपत्र वितरित कर दिया गया।

छात्राओं की सूझबूझ और सतर्कता के कारण समय रहते इस बड़ी गड़बड़ी को पकड़ा जा सका, वरना सैकड़ों छात्रों का पूरा सेमेस्टर दांव पर लग जाता। इस पूरे प्रशासनिक ड्रामे के कारण परीक्षा अपने निर्धारित समय से करीब आधा घंटा की देरी से शुरू हो सकी।

 क्या है पूरा मामला?

विश्वविद्यालयीन समय-सारणी के मुताबिक एलएलबी द्वितीय सेमेस्टर के परीक्षार्थियों के लिए ‘अपराध शास्त्र’ (क्रिमिनोलाजी, पेनोलाजी एवं विक्टिमोलाजी) विषय की परीक्षा निर्धारित थी। लेकिन जब परीक्षा हॉल में प्रश्नपत्र बांटे गए, तो उसके स्थान पर केवल ‘क्रिमिनोलाजी एवं पेनोलाजी’ विषय का (दूसरे कोड का) प्रश्नपत्र परीक्षार्थियों को थमा दिया गया। कॉलेज प्रशासन और वहां मौजूद वीक्षक (इन्विजिलेटर) इस बात से पूरी तरह बेखबर थे।

 छात्राओं के संदेह जताने पर मचा हड़कंप

परीक्षा शुरू होने के कुछ ही मिनटों बाद परीक्षा कक्ष में बैठी कुछ छात्राओं को प्रश्नपत्र के कोड और प्रश्नों को देखकर संदेह हुआ। उन्होंने तुरंत इसकी जानकारी वहां तैनात शिक्षकों को दी। जब प्रबंधन ने प्रश्नपत्र के कोड का मिलान मुख्य सूची से किया, तो कॉलेज प्रशासन के होश उड़ गए। आनन-फानन में बांटे जा चुके गलत प्रश्नपत्रों को वापस समेटा गया, जिससे परीक्षा हॉल में कुछ देर के लिए अफरा-तफरी की स्थिति निर्मित हो गई।

 ई-मेल के सहारे बची साख, प्रिंट निकालने दौड़े कर्मचारी

लापरवाही उजागर होते ही महाविद्यालय प्रबंधन ने तुरंत विश्वविद्यालय के परीक्षा विभाग से संपर्क साधा। गलती का अहसास होने पर विश्वविद्यालय द्वारा सुबह ठीक 11 बजकर 9 मिनट पर ई-मेल के माध्यम से सही प्रश्नपत्र कॉलेज को भेजा गया। इसके बाद कॉलेज के परीक्षा सेल में तत्काल उस प्रश्नपत्र का प्रिंट और फोटोकॉपी निकालकर विद्यार्थियों को उपलब्ध कराई गई। इस पूरी कशमकश में परीक्षा आधे घंटे की देरी से शुरू हो पाई, जिससे परीक्षार्थी मानसिक रूप से तनाव में नजर आए।

 जिम्मेदार कौन? आरोप-प्रत्यारोप का खेल शुरू

इस संवेदनशील मामले में अब जिम्मेदारी लेने के बजाय विश्वविद्यालय और कॉलेज प्रबंधन के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है।

कॉलेज सूत्रों का कहना है कि विश्वविद्यालय की ओर से ही गलत बंडल भेजा गया था, वहीं इस बात पर भी सवाल उठ रहे हैं कि परीक्षा शुरू होने से पहले स्ट्रांग रूम से पेपर निकालते वक्त कोड का मिलान क्यों नहीं किया गया?

बड़ा सवाल: यदि छात्राएं समय पर आवाज नहीं उठातीं, तो क्या गलत प्रश्नपत्र के आधार पर ही परीक्षा संपन्न करा दी जाती? इस गंभीर चूक ने उच्च शिक्षा विभाग की परीक्षा तैयारियों के दावों की पोल खोल कर रख दी है।

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