पेरिस/नई दिल्ली: फ्रांस में आयोजित G7 शिखर सम्मेलन के आखिरी दिन बुधवार सुबह एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक हुई। इस बैठक के बाद सदस्य देशों की ओर से एक साझा (संयुक्त) बयान जारी किया गया, जिसमें मिडिल ईस्ट (Middle East) के बिगड़ते हालातों पर गहरी चिंता जताते हुए लेबनान में तुरंत और प्रभावी युद्ध विराम (Ceasefire) लागू करने की पुरजोर मांग की गई है।
ज्वाइंट स्टेटमेंट में क्या कहा गया?
‘द गार्जियन’ की रिपोर्ट के मुताबिक, G7 देशों की ओर से जारी आधिकारिक घोषणापत्र में साफ कहा गया है कि लेबनान में तत्काल और मजबूत सीजफायर होना चाहिए। साझा बयान में लेबनानी नेतृत्व के उन प्रयासों का पुरजोर समर्थन किया गया है, जिनका उद्देश्य हिज्बुल्लाह को पूरी तरह वेपन-फ्री (हथियार मुक्त) करना, हथियारों पर सरकार का एकाधिकार (Monopoly) स्थापित करना और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा गारंटी के साथ देश की संप्रभुता व अखंडता की रक्षा करना है।
तनाव के बीच भी थम नहीं रहे इजरायली हमले
यह वैश्विक बैठक एक ऐसे समय में हुई जब जमीनी हालात बेहद गंभीर बने हुए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मौजूदगी में हुई इस अहम डील के बावजूद, इजरायल ने बीते दिन दक्षिण लेबनान (South Lebanon) को निशाना बनाकर हवाई हमला किया। इस ताजा हमले में कम से कम चार लोगों की मौत होने की पुष्टि हो चुकी है। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर शांति की अपीलों के बीच इजरायल का यह कदम वैश्विक चिंता को बढ़ा रहा है।
पीएम मोदी और डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात रही केंद्र बिंदु
इस पूरी समिट के दौरान भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी और उनके बयानों ने दुनिया का ध्यान खींचा। पीएम मोदी ने इस वैश्विक मंच से एक बार फिर युद्ध का कोई स्थायी और शांतिपूर्ण समाधान निकालने की वकालत की। समिट के इतर, प्रधानमंत्री मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हुई मुलाकात ने वैश्विक कूटनीति के गलियारों में जमकर सुर्खियां बटोरीं।
‘अमेरिका-ईरान डील’ को बताया गेमचेंजर
मिडिल ईस्ट में शांति बहाली के लिए पर्दे के पीछे चल रही कोशिशों पर भी इस बैठक में मुहर लगती दिखी।
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कनाडा के पीएम का बड़ा बयान: कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने सीएनएन (CNN) से बात करते हुए कहा कि मिडिल ईस्ट में तनाव को पूरी तरह खत्म करने के लिए अमेरिका और ईरान के बीच होने वाली संभावित डील एक ‘गेमचेंजर’ साबित होगी। उन्होंने कहा कि इससे न सिर्फ मौजूदा संकट सुलझेगा, बल्कि भविष्य का रास्ता भी साफ होगा। इसके साथ ही बैठक में यूक्रेन संकट को लेकर भी एक नए दृष्टिकोण से चर्चा की गई है।
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नाटो (NATO) ने किया स्वागत: नाटो के महासचिव मार्क रुटे ने भी युद्ध खत्म करने की दिशा में अमेरिका-ईरान डील का स्वागत किया है। उन्होंने विशेष रूप से ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ (Strait of Hormuz) को व्यापार के लिए फिर से खोलने की योजना को एक ऐतिहासिक कदम बताया। रुटे ने मीडिया ब्रीफिंग में कहा कि फ्रांस और ब्रिटेन के नेतृत्व वाली इस शांति पहल को कई सहयोगी देशों का मजबूत समर्थन हासिल है।
G7 देशों का यह साझा रुख और अमेरिका-ईरान के बीच का नया समीकरण यह साफ दिखाता है कि दुनिया के बड़े देश अब मिडिल ईस्ट में और ज्यादा तबाही बर्दाश्त करने के मूड में नहीं हैं। हालांकि, इजरायल के लगातार होते हमले इस बात का संकेत हैं कि कागजी समझौतों को जमीन पर उतारना अभी भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।
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