Raipur News: रायपुर। राजधानी रायपुर में नगर निगम के अधिकारी और कर्मचारियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर एकजुट होकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। विभिन्न कर्मचारी संगठनों के आह्वान पर निगम के अधिकारी और कर्मचारियों ने काम बंद कर एक दिवसीय हड़ताल की। इस दौरान निगम कार्यालय परिसर में प्रदर्शन करते हुए कर्मचारियों ने अपनी 9 सूत्रीय मांगों को लेकर सरकार और प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया।
हड़ताल के चलते नगर निगम के कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक और दैनिक कार्य प्रभावित रहे। जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, कर वसूली, फाइलों के निपटारे और अन्य नागरिक सेवाओं पर भी इसका असर देखने को मिला। कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो वे अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू करने को मजबूर होंगे।
लंबे समय से लंबित हैं मांगें
प्रदर्शनकारी कर्मचारियों का कहना है कि उनकी कई मांगें वर्षों से लंबित हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। बार-बार ज्ञापन और निवेदन देने के बावजूद समस्याओं का समाधान नहीं होने से कर्मचारियों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
कर्मचारी नेताओं ने कहा कि सरकार को नगर निगम कर्मचारियों की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए जल्द निर्णय लेना चाहिए, क्योंकि ये मांगें कर्मचारियों के हित और उनके भविष्य से जुड़ी हुई हैं।
पुरानी पेंशन योजना लागू करने की मांग
हड़ताल में शामिल कर्मचारियों की सबसे प्रमुख मांग वर्ष 2004 के बाद नियुक्त अधिकारी-कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना (OPS) लागू करना है। उनका कहना है कि नई पेंशन योजना कर्मचारियों के भविष्य को सुरक्षित नहीं करती, इसलिए उन्हें भी पुरानी पेंशन का लाभ दिया जाना चाहिए।
कर्मचारियों का मानना है कि सेवानिवृत्ति के बाद आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पुरानी पेंशन व्यवस्था आवश्यक है।
वेतन, पदोन्नति और स्वास्थ्य सुविधाओं पर जोर
कर्मचारियों ने कैशलेस चिकित्सा योजना लागू करने, पात्र कर्मचारियों को समय पर पदोन्नति देने और प्लेसमेंट कर्मचारियों को न्यूनतम 20 हजार रुपये मासिक वेतन देने की मांग भी उठाई। उनका कहना है कि बढ़ती महंगाई के दौर में वर्तमान वेतन पर्याप्त नहीं है।
इसके अलावा कर्मचारियों ने बैंक के माध्यम से शासकीय कर्मचारियों की तर्ज पर एक करोड़ रुपये का बीमा कवर देने की भी मांग की है।
निलंबित कर्मचारियों की बहाली की मांग
हड़ताल के दौरान कर्मचारियों ने निगम के निलंबित अधिकारी-कर्मचारियों की बहाली का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना है कि कई मामलों में कार्रवाई लंबित है, जिससे प्रभावित कर्मचारियों और उनके परिवारों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने मांग की कि ऐसे मामलों का शीघ्र निराकरण कर न्यायसंगत निर्णय लिया जाए।
रविवार अवकाश और सेटअप में शामिल करने की मांग
कर्मचारियों ने अपनी मांगों में रविवार को पूर्ण अवकाश सुनिश्चित करने और विभिन्न कर्मचारी हितों से जुड़े प्रस्तावों को नए सेटअप में शामिल करने की भी मांग रखी। उनका कहना है कि नियमित अवकाश और बेहतर कार्य व्यवस्था से कर्मचारियों की कार्यक्षमता में वृद्धि होगी।
अनिश्चितकालीन आंदोलन की चेतावनी
कर्मचारी नेताओं ने स्पष्ट कहा कि यदि सरकार और संबंधित विभाग उनकी मांगों पर जल्द कोई ठोस निर्णय नहीं लेते हैं तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। आवश्यकता पड़ने पर अनिश्चितकालीन हड़ताल भी की जाएगी, जिससे नगर निगम की सेवाएं व्यापक रूप से प्रभावित हो सकती हैं।
उन्होंने सरकार से सकारात्मक संवाद और त्वरित समाधान की मांग करते हुए कहा कि कर्मचारी अपने अधिकारों के लिए लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष जारी रखेंगे।
जनता पर भी पड़ा असर
हड़ताल का असर आम नागरिकों पर भी देखने को मिला। कई लोग अपने जरूरी कार्यों के लिए निगम कार्यालय पहुंचे, लेकिन कर्मचारियों के आंदोलन के कारण उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ा। अब सभी की नजर सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच होने वाली आगामी बातचीत पर टिकी हुई है, जिससे इस विवाद का समाधान निकल सके।
