रायपुर: राजधानी रायपुर की यातायात व्यवस्था को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और हाईटेक बनाने की दिशा में रायपुर कमिश्नरेट पुलिस ने एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है। पुलिस कमिश्नर डॉ. संजीव शुक्ला के मार्गदर्शन में कालीबाड़ी स्थित यातायात कार्यालय परिसर में ऑटो और ई-रिक्शा वाहनों में QR कोड चस्पा करने के दूसरे चरण का भव्य शुभारंभ किया गया।
इस हाईटेक पहल के जरिए रायपुर पुलिस का मुख्य उद्देश्य स्थानीय नागरिकों के साथ-साथ बाहर से आने वाले यात्रियों को एक बेहद सुरक्षित और सुगम ट्रांसपोर्ट सिस्टम की सुविधा उपलब्ध कराना है।
क्यूआर कोड (QR Code) से नागरिकों को कैसे मिलेगी सुरक्षा?
अक्सर ऑटो या ई-रिक्शा वाहनों में यात्रा के दौरान आपराधिक गतिविधियों या फिर सवारियों का सामान छूट जाने की शिकायतें मिलती हैं। रायपुर पुलिस की इस अनूठी तकनीक से अब इन समस्याओं पर पूरी तरह लगाम लगेगी:
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तुरंत मिलेगी ड्राइवर की कुंडली: यात्री ऑटो या ई-रिक्शा में सवार होने से पहले या सफर के दौरान अपने मोबाइल कैमरे से QR कोड को स्कैन करके वाहन चालक और मालिक की संपूर्ण जानकारी (नाम, मोबाइल नंबर, वाहन नंबर आदि) तुरंत देख सकते हैं।
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सामान गुम होने पर आसान होगी रिकवरी: कई बार सवारी अपना कीमती सामान ऑटो में भूल जाते हैं। ऐसी स्थिति में यदि आपके पास उस वाहन के QR कोड का फोटो या जानकारी है, तो वाहन मालिक से संपर्क करना और सामान वापस पाना बेहद आसान हो जाएगा।
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सुरक्षा की भावना: वाहनों में क्यूआर कोड लगने से अपराधियों में डर पैदा होगा और आम नागरिकों, विशेषकर महिलाओं और बच्चों में सुरक्षा की भावना जागृत होगी।
रायपुर पुलिस की अपील: बिना क्यूआर कोड लगे ऑटो या ई-रिक्शा में यात्रा करना असुरक्षित हो सकता है। इसलिए अपनी सुरक्षा के लिए हमेशा क्यूआर कोड लगे वाहनों का ही उपयोग करें।
रायपुर के नाम दर्ज हुआ ‘गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स’
20 मई को इस अभियान के प्रथम चरण की शुरुआत की गई थी। रायपुर पुलिस की मुस्तैदी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि रायपुर अब पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम के अंतर्गत चलने वाले वाहनों का डिजिटल रजिस्ट्रेशन करने वाला देश का पहला जिला बन गया है।
पुलिस टीम ने मात्र 15 दिनों के भीतर 15,047 ऑटो और ई-रिक्शा वाहनों का डिजिटल रजिस्ट्रेशन पूरा कर ‘गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स’ में अपना नाम दर्ज करा लिया है। जनसुरक्षा से जुड़ी इस अभूतपूर्व उपलब्धि पर पुलिस कमिश्नरेट के अधिकारियों को गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स की टीम द्वारा सर्टिफिकेट एवं मेडल प्रदान कर सम्मानित किया गया।
अगले चरण में क्या होगा?
इस पहल के माध्यम से शहर में संचालित होने वाले ऑटो और ई-रिक्शा की वास्तविक संख्या और जानकारी पुलिस के पास आ चुकी है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार:
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अगले चरण में सभी ऑटो/ई-रिक्शा चालकों को आधिकारिक परिचय पत्र (ID Card) दिए जाएंगे।
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शहर में ऑटो स्टैंड का चिन्हांकन (Marking) कर चालकों और सवारियों को विशेष सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
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इस प्रयास से न केवल यातायात में अनुशासन स्थापित होगा, बल्कि अपराध नियंत्रण (Crime Control) में भी यह मील का पत्थर साबित होगा।
जागरूकता के लिए शॉर्ट फिल्मों की स्क्रीनिंग
जनता को जागरूक करने के लिए पुलिस कमिश्नर के मार्गदर्शन में यातायात, साइबर फ्रॉड, महिला अपराध और सड़क सुरक्षा से संबंधित विशेष शॉर्ट फिल्मों की स्क्रीनिंग की गई। इन शॉर्ट फिल्मों को सोशल मीडिया, शहर के प्रमुख चौराहों पर लगी एल.ई.डी. स्क्रीन, मॉल्स और पीवीआर (PVR) सिनेमाघरों के माध्यम से जन-जन तक पहुँचाया जाएगा ताकि लोगों में अनुशासन और जागरूकता की भावना पैदा हो सके।
कार्यक्रम में ये रहे मौजूद
इस भव्य कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में अतिरिक्त पुलिस कमिश्नर अमित तुकाराम कांबले, डीसीपी उत्तर मयंक गुर्जर, डीसीपी पश्चिम संदीप पटेल, डीसीपी क्राइम स्मृतिक राजनाला, एडीसीपी मुख्यालय अर्चना झा, डीसीपी ट्रैफिक एवं प्रोटोकॉल विवेक शुक्ला सहित समस्त एसीपी यातायात उपस्थित रहे।
इसके साथ ही कॉर्पोरेट जगत और समाज से नारायण हॉस्पिटल के सीईओ युवराज खेमका, विश्व गीता इस्पात लिमिटेड से सुधीर सुल्तानिया, हीरा इस्पात लिमिटेड से प्रकाश अग्रवाल, सागर टीएमटी से पंकज अग्रवाल और ऑटो यूनियन के पदाधिकारी कमल पांडेय, नारायण सोनी सहित बड़ी संख्या में यातायात विभाग के अधिकारी व कर्मचारी मौजूद थे। कार्यक्रम के अंत में सहायक पुलिस आयुक्त (यातायात) सीमा अहिरवार द्वारा आभार व्यक्त किया गया।
