बस्तर/रायपुर। छत्तीसगढ़ का बस्तर संभाग न केवल अपनी प्राकृतिक सुंदरता और अनूठी आदिवासी संस्कृति के लिए जाना जाता है, बल्कि इसे ‘जड़ी-बूटियों का खजाना’ भी कहा जाता है। बस्तर के घने जंगलों में ऐसी पारंपरिक औषधियां पाई जाती हैं, जिनका उपयोग यहां के स्थानीय आदिवासी (वैद्य) सदियों से असाध्य बीमारियों को ठीक करने के लिए करते आ रहे हैं।
आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग फिर से आयुर्वेद की तरफ लौट रहे हैं। ऐसे में बस्तर की ये पारंपरिक औषधियां इंटरनेट पर खूब सर्च की जा रही हैं। आइए जानते हैं बस्तर की कुछ सबसे प्रमुख जड़ी-बूटियों और उनके फायदों के बारे में:
1. सफेद मूसली (Safed Musli) – ‘हर्बल वियाग्रा’
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क्या है यह: यह बस्तर के जंगलों में प्राकृतिक रूप से उगने वाली एक कंदयुक्त जड़ है। इसे आयुर्वेद में बेहद शक्तिशाली माना गया है।
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फायदे: यह शरीर की कमजोरी को दूर कर इम्यूनिटी (रोग प्रतिरोधक क्षमता) को तेजी से बढ़ाती है। इसे शारीरिक शक्ति और स्टैमिना बढ़ाने के लिए रामबाण माना जाता है।
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क्यों है डिमांड: इंटरनेशनल मार्केट में इसकी कीमत हजारों रुपये किलो है, इसलिए लोग इसकी खेती और फायदों के बारे में बहुत सर्च करते हैं।
2. कालमेघ (Kalmegh) – ‘कड़वाहट का राजा’
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क्या है यह: इसे स्थानीय भाषा में ‘भुईं नीम’ (जमीन का नीम) भी कहा जाता है क्योंकि यह स्वाद में बेहद कड़वा होता है।
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फायदे: लिवर से जुड़ी समस्याओं के लिए यह दुनिया की सबसे बेहतरीन औषधियों में से एक है। यह फैटी लिवर, पीलिया (Jaundice) और पुराने से पुराने बुखार को जड़ से खत्म करने में मदद करता है। इसके अलावा यह खून को साफ कर त्वचा रोगों को भी दूर करता है।
3. तिखुर (Tikhur) – बस्तर का ‘एनर्जी बूस्टर’
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क्या है यह: तिखुर एक प्रकार के पौधे की जड़ (कंद) से तैयार होने वाला सफेद पाउडर (स्टार्च) है। बस्तर के हर घर में इसका उपयोग होता है।
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फायदे: यह पेट के लिए वरदान है। अल्सर, कब्ज, और पेट की गर्मी को यह तुरंत शांत करता है। गर्मियों में इसका हलवा या शर्बत पीने से शरीर को तुरंत एनर्जी मिलती है और यह डिहाइड्रेशन से बचाता है।
4. सर्पगंधा (Sarpagandha) – ब्लड प्रेशर का काल
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क्या है यह: इसकी जड़ें सांप की तरह टेढ़ी-मेढ़ी होती हैं, इसलिए इसका नाम सर्पगंधा पड़ा। बस्तर के अंदरूनी जंगलों में यह कूट-कूट कर भरा है।
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फायदे: हाई ब्लड प्रेशर (High BP) और मानसिक तनाव/अनिद्रा (Insomnia) को ठीक करने में इसका कोई सानी नहीं है। जिन लोगों को रात में नींद नहीं आती, उनके लिए इसकी जड़ का चूर्ण बेहद फायदेमंद होता है।
5. नागरमोथा (Nagarmotha) – पेट दर्द और मोटापे का इलाज
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क्या है यह: यह जंगलों और नमी वाले इलाकों में उगने वाली एक विशेष घास की जड़ होती है, जिसमें से बेहद बेहतरीन खुशबू आती है।
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फायदे: यह पाचन तंत्र को दुरुस्त करता है। अगर किसी को पेट में कीड़े या लगातार दर्द की शिकायत हो, तो इसका काढ़ा आराम देता है। आजकल लोग इसे वजन घटाने (Weight Loss) के घरेलू नुस्खे के रूप में बहुत सर्च कर रहे हैं।
वैद्यों की सलाह: बस्तर के आदिवासी ‘सिरहा’ और ‘वैद्य’ मानते हैं कि इन जड़ी-बूटियों का सही लाभ तभी मिलता है जब इन्हें सही मात्रा और सही समय पर लिया जाए। किसी भी जड़ी-बूटी के व्यावसायिक या औषधीय उपयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूरी है।
