Balod News: सरपंच के मकान पर छापा, दो माजदा गाड़ियों में भरकर ले गई वन विभाग की टीम सागौन लकड़ी

Chhattisgarh Balod News: बालोद। छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में वन विभाग ने अवैध लकड़ी के कारोबार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए अंगारी गांव की सरपंच के मकान पर छापा मारा। संयुक्त कार्रवाई के दौरान मौके से बड़ी मात्रा में कीमती सागौन (टीक) के चिरान और गोले बरामद किए गए हैं। प्रारंभिक आकलन के अनुसार जब्त लकड़ी की कीमत लाखों रुपये बताई जा रही है। मामले में सरपंच के पति अश्विनी डड़सेना के खिलाफ वन विभाग ने वैधानिक कार्रवाई शुरू कर दी है।

वन विभाग की यह कार्रवाई बालोद वन परिक्षेत्र की टीम और उड़न दस्ते (फ्लाइंग स्क्वॉड) ने संयुक्त रूप से की। अधिकारियों ने अंगारी गांव स्थित सरपंच के मकान में दबिश देकर परिसर की तलाशी ली, जहां भारी मात्रा में सागौन की लकड़ी रखी मिली। बरामद लकड़ी को जब्त कर दो माजदा वाहनों में भरकर वन विभाग के काष्ठागार पहुंचाया गया।

लकड़ी की गणना जारी, कीमत का होगा आकलन

वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार जब्त की गई सागौन लकड़ी की मात्रा काफी अधिक है। फिलहाल लकड़ी की गिनती, माप और मूल्यांकन का कार्य जारी है। इसके बाद ही जब्त लकड़ी की वास्तविक मात्रा और उसकी अनुमानित कीमत का आधिकारिक आंकड़ा सामने आएगा।

लकड़ी के स्रोत की होगी जांच

डीएफओ अभिषेक अग्रवाल ने बताया कि बड़ी मात्रा में सागौन के चिरान और गोले बरामद हुए हैं। विभाग यह पता लगाने में जुटा है कि यह लकड़ी कहां से लाई गई, किस वन क्षेत्र से इसका परिवहन किया गया और किस आरा मिल में इसका चिरान कराया गया। यदि जांच में वन अधिनियम या अन्य नियमों का उल्लंघन सामने आता है तो संबंधित लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

घर में बने फर्नीचर भी जांच के दायरे में

डीएफओ ने बताया कि मकान में सागौन की लकड़ी से बने कुछ फर्नीचर भी पाए गए हैं। इनकी भी जांच की जाएगी कि इनमें प्रयुक्त लकड़ी वैध रूप से खरीदी गई थी या नहीं। यदि फर्नीचर में इस्तेमाल लकड़ी भी अवैध रूप से प्राप्त की गई पाई गई तो उसे भी जब्त कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

वन विभाग की कार्रवाई से मचा हड़कंप

सरपंच के घर पर हुई इस कार्रवाई के बाद पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया है। वन विभाग अब मामले से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रहा है। विभाग यह भी पता लगाएगा कि अवैध सागौन लकड़ी के इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं। जांच पूरी होने के बाद मामले में वन अधिनियम के तहत आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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