नई दिल्ली / रायपुर। देश के राष्ट्रपति भवन द्वारा स्वतंत्रता दिवस पर आयोजित होने वाले पारंपरिक ‘एट होम’ (At Home) समारोह के आधिकारिक निमंत्रण पत्र में इस वर्ष बस्तर की अमर लोकगाथा ‘झिटकू–मिटकी’ के प्रतीक (मोटिफ) को स्थान दिया गया है। यह निर्णय छत्तीसगढ़ की समृद्ध जनजातीय कला और दक्षिण एशियाई सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक व राष्ट्रीय पटल पर मिली ऐतिहासिक मान्यता का प्रतीक है।
वन मंत्री केदार कश्यप ने इस उपलब्धि को पूरे प्रदेश और बस्तर अंचल के लिए अत्यंत गौरवपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि बस्तर की कला और संस्कृति आज भारत की सीमाओं से आगे बढ़कर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी अमिट छाप छोड़ रही है।
300 साल पुरानी अमर प्रेमगाथा और ढोकरा कला
झिटकू–मिटकी की लगभग 300 वर्ष पुरानी गाथा केवल एक प्रेम कहानी नहीं, बल्कि बस्तर के आदिवासी समाज की परंपराओं, सामाजिक मूल्यों और सांस्कृतिक चेतना का जीवंत स्तंभ है:
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ढोकरा (बेल मेटल) शिल्प का गौरव: बस्तर की प्रसिद्ध ढोकरा हस्तकला में झिटकू–मिटकी की प्रतिमाओं का विशेष स्थान है। यह कलाकृति वर्षों से सम्मान-चिह्न के रूप में वैश्विक स्तर पर भेंट की जाती रही है।
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राष्ट्रपति भवन में भेंट: हाल ही में राष्ट्रपति भवन में आयोजित कार्यक्रम के दौरान छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से झिटकू-मिटकी की पारंपरिक ढोकरा कलाकृति राष्ट्रपति को भेंट की गई थी, जिसे अब आधिकारिक निमंत्रण पत्र पर उकेरा गया है।
जनजातीय अस्मिता को वैश्विक पहचान
मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश की विविध जनजातीय विरासत को सम्मान देने का अभूतपूर्व कार्य हो रहा है। वहीं, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार छत्तीसगढ़ की लोककला, शिल्प और बस्तर की सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक मंचों तथा प्रवासी भारतीय समुदायों तक पहुँचाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।
राष्ट्रपति भवन के निमंत्रण पत्र पर झिटकू–मिटकी का यह अंकन बस्तर की अस्मिता, ढोकरा शिल्प कला और छत्तीसगढ़ी लोक-आस्था को मिला एक ऐतिहासिक सम्मान है।
