Raipur News: सक्ती में विश्व आदिवासी दिवस पर गरमाया माहौल, छात्र की मौत पर प्रदर्शन के बाद जोगी कांग्रेस नेता हिरासत में

Chhattisgarh Raipur News: रायपुर। विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ के अलग-अलग जिलों में आदिवासी समाज ने उत्साह और गौरव के साथ कार्यक्रम आयोजित किए। कई जगह पारंपरिक वेशभूषा में रैली निकाली गई और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए समाज की समृद्ध परंपरा, संस्कृति और प्रकृति से जुड़ाव का संदेश दिया गया। वहीं सक्ती में आयोजित कार्यक्रम के दौरान एकलव्य आदर्श स्कूल में आदिवासी छात्र की मौत का मामला उठने से माहौल गरमा गया।

सक्ती में कार्यक्रम के दौरान आदिवासी समाज के लोगों और राजनीतिक दलों के नेताओं ने एकलव्य आदर्श स्कूल में छात्र की मौत के मामले में अधिकारियों से न्याय की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने मामले में तत्काल दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग उठाई। स्थिति बिगड़ने की आशंका को देखते हुए पुलिस ने जोगी कांग्रेस के जिला अध्यक्ष अर्जुन राठौर को हिरासत में ले लिया।

मौके पर मौजूद अधिकारियों ने प्रदर्शन कर रहे लोगों को भरोसा दिलाया कि मामले की जांच कराई जा रही है और जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। इसके बाद पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित किया।

वहीं भानुप्रतापपुर में विश्व आदिवासी दिवस को लेकर समाज में खासा उत्साह देखने को मिला। गोंडवाना भवन से आदिवासी समाज की रैली निकाली गई, जो भानुप्रताप देब चौक पहुंची। यहां सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इसके बाद समाज के लोग मुख्य कार्यक्रम में शामिल होने के लिए अंतागढ़ रवाना हुए।

कार्यक्रम में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, दिल्ली के पूर्व प्रोफेसर डॉ. लक्ष्मण यादव भी पहुंचे। उन्होंने आदिवासी समाज के उत्थान, शिक्षा और सामाजिक विकास को लेकर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि समाज के विकास के लिए शिक्षा, संगठन और अपने अधिकारों के प्रति जागरूकता जरूरी है।

सारंगढ़ में भी विश्व आदिवासी दिवस पारंपरिक उत्साह और गौरव के साथ मनाया गया। कार्यक्रम की शुरुआत गोंडवाना भवन में पूजा-अर्चना के साथ हुई। इसके बाद शहर के मुख्य मार्गों से भव्य रैली निकाली गई। पारंपरिक वेशभूषा में शामिल युवाओं, महिलाओं और बुजुर्गों ने ढोल-नगाड़ों और लोकगीतों के बीच आदिवासी संस्कृति की झलक पेश की।

रैली का समापन कृषि उपज मंडी प्रांगण में हुआ, जहां सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। कलाकारों ने लोकनृत्य और गीतों के जरिए आदिवासी समाज की परंपरा, संस्कृति और प्रकृति से उसके गहरे संबंध को प्रस्तुत किया। इस दौरान समाज की एकता, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का संदेश दिया गया।

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