Chhattisgarh Jagdalpur News : जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के जगदलपुर में गंगामुंडा तालाब के समीप श्री गंगा कैलाशनाथ चतुर्मुख शिवालय का निर्माण तेजी से जारी है। करीब 30 हजार वर्गफीट क्षेत्र में बन रहे इस भव्य मंदिर को दक्षिण भारतीय द्रविड़ स्थापत्य शैली में तैयार किया जा रहा है। निर्माण पूरा होने के बाद मंदिर के बस्तर के प्रमुख आध्यात्मिक और पर्यटन स्थलों में शामिल होने की उम्मीद है। मंदिर में वर्ष 2027 की महाशिवरात्रि पर प्राण प्रतिष्ठा का लक्ष्य रखा गया है।
बस्तर डिस्ट्रिक आंध्र एसोसिएशन के अध्यक्ष एम. जयंत नायडू के अनुसार, श्री गंगा कैलाशनाथ चतुर्मुख शिवालय ट्रस्ट की देखरेख में मंदिर का निर्माण कराया जा रहा है। मंदिर को दक्षिण भारतीय स्थापत्य की विशेष पहचान देने के लिए तिरुपति के वास्तु विशेषज्ञ बाल भास्कर से इसका वास्तु नक्शा तैयार कराया गया है। बताया गया है कि बाल भास्कर अब तक 216 मंदिरों की रूपरेखा तैयार कर चुके हैं।
मंदिर परिसर में कई देवी-देवताओं के मंदिर भी बनाए जा रहे हैं। प्रथम तल के गर्भगृह में चतुर्मुख शिवलिंग की स्थापना की जाएगी। वहीं भूतल पर संभाग का पहला नवग्रह मंदिर बनाया जा रहा है। परिसर में बजरंगबली मंदिर, यज्ञशाला और ध्यान केंद्र भी तैयार किए जा रहे हैं। प्रथम तल पर दुर्गा, सरस्वती, अन्नपूर्णा, गणेश और कार्तिकेय, राम दरबार तथा सूर्यदेव के कुल सात मंदिर बनाए जा रहे हैं। मुख्य द्वार पर हनुमानजी और प्रवेश द्वार पर मां दंतेश्वरी की प्रतिमा स्थापित की जाएगी।
मंदिर की स्थापत्य कला और शिल्पकला को खास रूप देने के लिए विशेष कारीगर काम कर रहे हैं। यहां स्थापित होने वाली देवी-देवताओं की प्रतिमाएं महाबलीपुरम से लाई जा चुकी हैं। वहीं आंध्र प्रदेश के काकीनाडा से पहुंचे करीब 40 शिल्पकार पत्थरों पर नक्काशी और अन्य शिल्प कार्यों को अंतिम रूप देने में जुटे हैं।
मंदिर निर्माण में आंध्र समाज के साथ स्थानीय लोगों और प्रदेश के अन्य शहरों के श्रद्धालुओं का भी सहयोग मिल रहा है। निर्माण पूरा होने के बाद श्री गंगा कैलाशनाथ चतुर्मुख शिवालय बस्तर की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को नई मजबूती देने के साथ श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए आकर्षण का नया केंद्र बन सकता है।
