Chhattisgarh Raipur News: रायपुर। छत्तीसगढ़ के प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत सहायक शिक्षकों और शिक्षकों की पदोन्नति को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। पदोन्नति के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) को अनिवार्य किए जाने के फैसले के विरोध में शिक्षक संगठनों ने सरकार के सामने अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। इसी कड़ी में 135 मान्यता प्राप्त और गैर-मान्यता प्राप्त संगठनों के प्रतिनिधि संगठन छत्तीसगढ़ कर्मचारी-अधिकारी फेडरेशन ने स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव को ज्ञापन सौंपकर फैसले पर पुनर्विचार की मांग की है।
फेडरेशन के प्रांतीय संयोजक कमल वर्मा और संरक्षक सुभाष मिश्र ने ज्ञापन में कहा कि मौजूदा शिक्षक भर्ती एवं पदोन्नति नियमों में पदोन्नति के लिए TET को अनिवार्य किए जाने का स्पष्ट प्रावधान नहीं है। संगठन का कहना है कि केवल विभागीय बैठकों के आधार पर पदोन्नति प्रक्रिया में अतिरिक्त शर्त जोड़ना प्रचलित नियमों की मूल भावना के विपरीत है।

फेडरेशन ने दावा किया कि वर्षों से शासकीय सेवा दे रहे शिक्षकों को केवल TET उत्तीर्ण नहीं होने के आधार पर पदोन्नति से वंचित करना उचित नहीं होगा। इससे वरिष्ठ शिक्षकों के पदोन्नति और वरिष्ठता संबंधी अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। संगठन ने आशंका जताई कि इस मुद्दे को लेकर भविष्य में न्यायालयीन विवाद की स्थिति भी बन सकती है।
फेडरेशन ने सरकार से पदोन्नति में TET की अनिवार्यता तत्काल समाप्त करने, विभागीय वरिष्ठता सूची के आधार पर रिक्त पदों पर पात्र शिक्षकों की पदोन्नति करने और लंबे समय से लंबित पदोन्नति प्रक्रिया को जल्द पूरा करने की मांग की है।
संगठन ने यह भी कहा है कि यदि शिक्षकों को TET उत्तीर्ण करने के लिए वर्ष 2028 तक की समय-सीमा दी गई है, तो उन्हें इस अवधि में परीक्षा पास करने के पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराए जाने चाहिए। इसके लिए लोक शिक्षण संचालनालय के माध्यम से जल्द विभागीय TET आयोजित कराने की मांग भी की गई है।
इसके अलावा फेडरेशन ने पदोन्नति प्रक्रिया में आरक्षण से जुड़े सभी नियमों का पूरी तरह पालन सुनिश्चित करने की मांग की है। संगठन का कहना है कि प्रदेश में बड़ी संख्या में शिक्षक पदोन्नति प्रक्रिया को लेकर असमंजस में हैं। ऐसे में सरकार को शिक्षकों के हित, वरिष्ठता और शिक्षा व्यवस्था की निरंतरता को ध्यान में रखते हुए जल्द स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
फेडरेशन ने उम्मीद जताई है कि सरकार इस मामले में सकारात्मक और न्यायसंगत निर्णय लेगी, जिससे शिक्षकों में बढ़ रहा असंतोष दूर हो सके और पदोन्नति प्रक्रिया को जल्द आगे बढ़ाया जा सके।
