CG political: डिप्टी सीएम अरुण साव का बस्तर में बड़ा एक्शन: 69 करोड़ के ओवरब्रिज में देरी पर ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट की चेतावनी

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जगदलपुर/रायपुर। छत्तीसगढ़ में विकास कार्यों में लेट-लतीफी और लापरवाही बरतने वालों पर विष्णुदेव साय सरकार का हंटर चलना शुरू हो गया है। उप मुख्यमंत्री तथा लोक निर्माण मंत्री अरुण साव के कड़े निर्देश पर विभाग ने बस्तर जिले में रेलवे ओवरब्रिज (ROB) के निर्माण में सुस्ती को लेकर निर्माण एजेंसी को अंतिम चेतावनी के साथ कड़ा नोटिस जारी किया है। डिप्टी सीएम द्वारा किए गए औचक निरीक्षण के बाद यह बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की गई है।

 डिप्टी सीएम के औचक निरीक्षण में खुली पोल, अधिकारियों को भी लगी फटकार

डिप्टी सीएम अरुण साव ने 6 जून 2026 को बस्तर प्रवास के दौरान राष्ट्रीय राजमार्ग-30 (NH-30) पर किरंदुल-विशाखापट्टनम रेलवे लाइन के ऊपर बन रहे फोरलेन रेलवे ओवरब्रिज का जमीनी निरीक्षण किया था।

अनुबंध के अनुसार काम में प्रगति न होने और साइट पर ठेकेदार का सुस्त रवैया देखकर डिप्टी सीएम का पारा चढ़ गया था। उन्होंने मौके पर ही ठेकेदार और विभागीय अधिकारियों को जमकर फटकार लगाई थी, जिसके बाद अब विभाग पूरी तरह एक्शन मोड में आ गया है।

 पर्याप्त संसाधन नहीं जुटाने पर मेसर्स अशोक कुमार मित्तल को नोटिस

लोक निर्माण विभाग (PWD) के राष्ट्रीय राजमार्ग परिक्षेत्र के मुख्य अभियंता ने निर्माण एजेंसी मेसर्स अशोक कुमार मित्तल को कारण बताओ नोटिस थमाया है। नोटिस में साफ़ कहा गया है कि:

  • साइट पर पर्याप्त जगह उपलब्ध होने के बावजूद मैन-पॉवर (मजदूरों), मटेरियल (सामग्री) और मशीनरी की व्यवस्था बेहद खराब है।

  • विभाग द्वारा बार-बार चेतावनी दिए जाने के बाद भी काम की गति असंतोषजनक पाई गई है, जिससे जनता को भारी परेशानी हो रही है।

प्रोजेक्ट का पूरा लेखा-जोखा (Quick Info)

मुख्य बिंदु विवरण
प्रोजेक्ट का नाम फोरलेन रेलवे ओवरब्रिज (ROB)
कहाँ बन रहा है? केशलूर-जगदलपुर मार्ग (बस्तर संभाग)
प्रोजेक्ट की कुल लागत ₹69 करोड़ 36 लाख रुपए
निरीक्षण की तारीख 6 जून 2026 (डिप्टी सीएम अरुण साव द्वारा)
दोषी निर्माण एजेंसी मेसर्स अशोक कुमार मित्तल
लापरवाही का कारण लेबर, मशीनरी और सामग्री की भारी कमी

 सुधरो… वरना सीधे होंगे ‘ब्लैकलिस्ट’!

विभाग ने ठेकेदार को तुरंत पर्याप्त संसाधन जुटाकर काम की गति रॉकेट की तरह बढ़ाने के कड़े निर्देश दिए हैं। विभाग ने चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर काम की प्रगति में उल्लेखनीय सुधार नहीं दिखा, तो अनुबंध की शर्तों के तहत निर्माण एजेंसी को ब्लैकलिस्ट (काली सूची में डालना) किया जाएगा और भारी आर्थिक दंड लगाया जाएगा।

यह ओवरब्रिज बस्तर संभाग की कनेक्टिविटी के लिए रीढ़ की हड्डी माना जा रहा है, और सरकार के इस सख्त रुख से प्रोजेक्ट जल्द पूरा होने की उम्मीद जगी है।

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