रायपुर / धमतरी छत्तीसगढ़ में भारतमाला प्रोजेक्ट (Raipur-Visakhapatnam Expressway) के तहत जमीन अधिग्रहण में एक और बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। धमतरी जिले के ग्राम सिवनीकला में नियमों को ताक पर रखकर 19 खसरों की जमीन को 92 छोटे-छोटे टुकड़ों में बांट दिया गया और करोड़ों रुपये का फर्जी मुआवजा निकाल लिया गया। इस पूरे खेल में इलाके के रसूखदार जमीन दलाल, बड़े नेता और राजस्व विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत की बात सामने आ रही है।
क्या है पूरा घोटाला और कैसे हुआ खेल?
मामला जनवरी 2019 से शुरू हुआ, जब सिवनीकला के 19 खसरों की जमीन को एक्सप्रेसवे के लिए अधिग्रहित करने की प्रारंभिक सूचना (Notification) जारी की गई थी। नियमतः अधिसूचना जारी होने के बाद जमीनों की खरीदी-बिक्री या बंटवारे पर रोक होती है।
लेकिन, मोटी कमाई के चक्कर में गांव के कुछ रसूखदार नेताओं और राजस्व अधिकारियों ने जमीन मालिकों से साठगांठ की। बड़ी जमीनों के कागजों पर ही 92 छोटे-छोटे टुकड़े कर दिए गए। ऐसा इसलिए किया गया ताकि हर टुकड़े के नाम पर अलग से भारी-भरकम मुआवजा उठाया जा सके। इस फर्जीवाड़े से शासन के खजाने को करोड़ों रुपये का चूना लगाया गया है।
असली किसान दाने-दाने को मोहताज, दलाल हुए मालामाल
इस सुनियोजित घोटाले का सबसे बुरा असर गांव के असली भूमिस्वामियों पर पड़ा है। सेटिंग करने वाले रसूखदारों को तो लाखों-करोड़ों का मुआवजा मिल गया, जबकि जमीन के असली हकदार और सीधे-साधे किसानों को बेहद कम रकम थमा दी गई।
पीड़ित किसान अमित चंद्राकर, बलराम, प्रकाश, हेमशंकर समेत कई ग्रामीणों ने इस धांधली के खिलाफ कलेक्टर से लेकर संभाग आयुक्त (कमिश्नर) तक लिखित शिकायत की थी, लेकिन रसूखदारों के दबाव के चलते स्थानीय स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। थक-हारकर अब ग्रामीणों ने इस पूरे मामले की शिकायत प्रवर्तन निदेशालय (ED) से की है।
अभनपुर में जेल दाखिला, तो सिवनीकला पर मेहरबानी क्यों?
ग्रामीणों का सवाल है कि जब इसी भारतमाला प्रोजेक्ट के तहत रायपुर के अभनपुर इलाके में हुए ऐसे ही फर्जीवाड़े पर ACB (एंटी करप्शन ब्यूरो) और ED ने कड़ी जांच की थी, जिसमें कई राजस्व अधिकारी और दलाल जेल की हवा खा रहे हैं, तो फिर सिवनीकला के आरोपियों पर हाथ डालने से पुलिस और प्रशासन क्यों बच रहा है? चर्चा है कि इसमें शामिल सफेदपोशों और बड़े अफसरों को बचाने के लिए मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है।
रेलवे लाइन प्रभावित 35 गांवों में जमीन रजिस्ट्री पर रोक
दूसरी ओर, नई रेलवे लाइन परियोजना को लेकर जिला प्रशासन अब अलर्ट मोड पर दिख रहा है। रेलवे लाइन से प्रभावित होने वाले आलेसुर, पचरी, छड़िया, नाहरडीह, पथरकुंडी, खरोरा, मांठ, बेलदारसिवनी समेत कुल 35 गांवों की जमीन अब सीधे तौर पर प्रभावित होगी। भविष्य में ऐसे किसी भी भूमि घोटाले को रोकने के लिए कलेक्टर ने इन सभी 35 गांवों में जमीनों की खरीदी-बिक्री और रजिस्ट्री पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है।
