Bastar School News: नए सत्र से पहले शिक्षा व्यवस्था पर सवाल: बस्तर में 60 जर्जर भवनों और शौचालय संकट के बीच शुरू होगी पढ़ाई

जगदलपुर। छत्तीसगढ़ में 16 जून से नए शैक्षणिक सत्र (New Academic Session) का आगाज होने जा रहा है। नौनिहाल नए उत्साह के साथ स्कूलों का रुख करेंगे, लेकिन बस्तर जिले के सरकारी स्कूलों की जमीनी हकीकत शिक्षा व्यवस्था के दावों की पोल खोल रही है। मानसून की दस्तक के बीच जिले के हजारों बच्चों को जर्जर भवनों और बुनियादी सुविधाओं के अभाव में जान जोखिम में डालकर पढ़ाई करनी पड़ेगी।

शिक्षा विभाग के अपने आंकड़े बताते हैं कि जिले में दर्जनों स्कूल भवनविहीन और जर्जर हैं, जबकि सैकड़ों स्कूलों में शौचालय जैसी प्राथमिक सुविधा तक नहीं है।

आंकड़ों की जुबानी: बस्तर के स्कूलों का खस्ताहाल

बस्तर जिले के सरकारी स्कूलों के जो आंकड़े सामने आए हैं, वे बेहद चौंकाने वाले और चिंताजनक हैं:

समस्या का प्रकार प्राथमिक स्कूल मिडिल स्कूल हाईस्कूल हायर सेकेंडरी कुल स्कूल
भवनविहीन स्कूल 16 11 06 04 37
जर्जर भवन 32 28 00 00 60
शौचालय ही नहीं है 120 49 02 05 176
शौचालय (अनुपयोगी/खराब) 133 61 02 02 198

नौनिहालों पर सबसे ज्यादा खतरा: छोटे बच्चों के स्कूल सबसे बदहाल

हैरानी की बात यह है कि जिले के सभी 60 जर्जर स्कूल भवनों में एक भी हाईस्कूल या हायर सेकेंडरी शामिल नहीं है। सबसे खस्ताहाल प्राथमिक (32) और माध्यमिक (28) स्कूलों की है, जहाँ 5 से 14 साल के मासूम बच्चे पढ़ते हैं। जर्जर छतों और टूटती दीवारों के बीच बारिश के दिनों में हादसा होने का डर लगातार बना रहेगा।

शौचालय का अभाव: छात्राओं की सुरक्षा और सम्मान दांव पर

ग्रामीण क्षेत्रों के इन स्कूलों में पढ़ने वाले अधिकांश बच्चे आदिवासी और गरीब परिवारों से आते हैं। जिले के 374 स्कूलों में शौचालय या तो हैं ही नहीं या फिर वे कबाड़ हो चुके हैं। शौचालय न होने के कारण सबसे ज्यादा परेशानी छात्राओं को होती है। उन्हें खुले में जाने के लिए मजबूर होना पड़ता है, जो उनकी सुरक्षा और स्वास्थ्य दोनों के लिहाज से एक गंभीर खिलवाड़ है।

सत्र शुरू होने से पहले जब जगदलपुर के नजदीकी स्कूलों का निरीक्षण किया गया, तो डरावनी तस्वीरें सामने आईं:

  • हाटगुड़ा प्राथमिक शाला: यहाँ टिन की छतें पूरी तरह जंग खा चुकी हैं। शौचालय परिसर में बड़ी-बड़ी झाड़ियां और घास-फूस उग आए हैं।

  • बाबू सेमरा स्कूल: पर्याप्त जमीन होने के बाद भी यहाँ बाउंड्रीवाल और खेल मैदान नहीं है, जिससे परिसर पूरी तरह असुरक्षित है।

विशेषज्ञों का सवाल: शिक्षाविदों का कहना है कि जो मरम्मत कार्य गर्मी की छुट्टियों में पूरे हो जाने चाहिए थे, वे मानसून आने तक अधूरे क्यों हैं? क्या प्रशासन किसी हादसे का इंतजार कर रहा था?

अधिकारी का दावा: ‘प्राथमिकता के आधार पर होगा सुधार’

इस पूरे मामले पर जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) बलिराम बघेल का कहना है कि:

“सभी सात विकासखंडों के बीईओ (BEO) और प्राचार्यों को व्यवस्थाएं दुरुस्त करने के निर्देश दिए गए हैं। गर्मी की छुट्टियों में कुछ जगहों पर काम हुआ है। नए शौचालयों की स्वीकृति मिल चुकी है और जहाँ दिक्कतें हैं, वहाँ प्राथमिकता के आधार पर काम शुरू कराया जाएगा।”

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