Sakti News: शराब की गुणवत्ता पर फिर उठे सवाल: सक्ती में बोतल से निकला कीड़ा, 10 दिन में दूसरा मामला

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सक्ती/डभरा। छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले से सरकारी शराब दुकान की व्यवस्था और गुणवत्ता पर बड़ा सवाल उठाने वाला मामला सामने आया है। यहाँ एक सरकारी देसी शराब दुकान से खरीदी गई सीलपैक बोतल (पौवा) के अंदर कीड़ा मिलने के बाद हड़कंप मच गया है। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसे लेकर शराब उपभोक्ताओं में भारी नाराजगी है। स्थानीय लोगों ने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

क्या है पूरा मामला?

जानकारी के अनुसार, यह घटना सक्ती जिले के डभरा स्थित शासकीय देशी शराब दुकान की है:

  • गुरुवार को एक ग्राहक ने दुकान से ‘प्लेन ब्रांड’ का एक पौवा खरीदा था.

  • शराब पीने के लिए जब उसने बोतल को देखा, तो सीलपैक बोतल के अंदर एक कीड़ा तैरता हुआ दिखाई दिया.

  • उपभोक्ता ने तुरंत इसकी शिकायत दुकान के सेल्समैन से की और पूरी घटना का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दिया, जो अब तेजी से वायरल हो रहा है.

10 दिनों के भीतर छत्तीसगढ़ में यह दूसरा मामला

प्रदेश की सरकारी शराब दुकानों में लापरवाही का यह कोई पहला मामला नहीं है। पिछले 10 दिनों के भीतर छत्तीसगढ़ में यह दूसरी बड़ी लापरवाही सामने आई है:

जिला घटना का विवरण वर्तमान स्थिति
सक्ती (डभरा) सीलपैक ‘प्लेन ब्रांड’ देशी शराब में कीड़ा मिला. वीडियो वायरल, जांच की मांग.
बालोद (तांदुला डैम) ‘रोमियो ब्रांड’ की शराब बोतल में कांच के टुकड़े मिले थे. कांग्रेस जिला अध्यक्ष चंद्रेश हिरवानी ने उठाया था मुद्दा, आबकारी विभाग ने जांच का भरोसा दिया था.

उपभोक्ताओं की सुरक्षा से खिलवाड़: आबकारी विभाग की चुप्पी

स्थानीय लोगों और उपभोक्ताओं का कहना है कि सरकारी दुकानों में बेची जाने वाली शराब की गुणवत्ता और शुद्धता सुनिश्चित करना पूरी तरह से आबकारी विभाग की जिम्मेदारी है। पैकेजिंग और क्वालिटी कंट्रोल में इस तरह की लापरवाही लोगों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकती है।

अधिकारी ने नहीं उठाया फोन: इस पूरे मामले को लेकर जब डभरा आबकारी वृत्त प्रभारी कोमल सिदार से संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो उनसे बातचीत नहीं हो सकी।

लैब टेस्ट के बाद ही साफ होगी स्थिति

हालांकि, आबकारी मामलों के जानकारों का मानना है कि बॉटलिंग प्लांट में पैकिंग के दौरान तकनीकी खामी या रखरखाव में कमी के कारण ऐसा हो सकता है। केवल सोशल मीडिया वीडियो के आधार पर अंतिम निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा जा सकता। संबंधित बोतल की लैब जांच और विभागीय स्क्रूटनी के बाद ही असली सच्चाई सामने आएगी।

सक्ती से न्यूज़ पोर्टल ब्यूरो की रिपोर्ट

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