Padma Awards 2026 Chhattisgarh : नक्सलियों के गढ़ में पैदल चलकर बदली 500 गांवों की तकदीर, राष्ट्रपति ने किया सम्मानित

Padma Awards 2026 Chhattisgarh

नई दिल्ली/रायपुर। छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित और सुदूर वनांचल बस्तर में चार दशकों से मूक साधना कर रही महान समाजसेवी डॉ. बुधरी ताती को देश के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान ‘पद्म श्री’ (Padma Shri Award 2026) से नवाजा गया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें यह सम्मान आदिवासी अंचल में महिला सशक्तिकरण, कुपोषण के खिलाफ जंग और शिक्षा की अलख जगाने के लिए प्रदान किया। बस्तर के जनजातीय समाज में बेहद आदर के साथ उन्हें ‘बड़ी दीदी’ कहकर पुकारा जाता है।

पद्म पुरस्कारों की पूरी सूची देखने के लिए यहाँ क्लिक करें: Padma Awards 2026 List https://groundzero24.in/

अबूझमाड़ के जंगलों में 500 गांवों तक नापा पैदल सफर दक्षिण बस्तर के दंतेवाड़ा जिले के हीरानार गांव की रहने वाली डॉ. बुधरी ताती की यह सेवा यात्रा आज की नहीं, बल्कि साल 1984 से जारी है। उस दौर में जब बस्तर के घने जंगलों के बीच न तो चलने के लिए सुरक्षित सड़कें थीं और न ही संचार के लिए मोबाइल नेटवर्क, तब ‘बड़ी दीदी’ ने अबूझमाड़ और दंतेवाड़ा के बेहद संवेदनशील इलाकों का रुख किया। उन्होंने घने जंगलों के बीच स्थित 500 से अधिक गांवों की पैदल यात्रा की और वनवासियों का विश्वास जीता।

बारसूर को बनाया था क्रांति का केंद्र आदिवासी परिवारों को मुख्यधारा से जोड़ने और बच्चों की उपेक्षित शिक्षा को पटरी पर लाने के लिए उन्होंने जमीनी स्तर पर काम किया। साल 1986 में उन्होंने बस्तर के बारसूर को महिला चेतना और सशक्तिकरण के एक बड़े केंद्र के रूप में स्थापित किया। नक्सलियों के खौफ और सामाजिक रूढ़ियों के बीच उन्होंने वनवासी माता-पिता को समझाया कि उनके बच्चों की तकदीर सिर्फ और सिर्फ शिक्षा से ही बदल सकती है।

आत्मनिर्भरता की नई मिसाल: बेटियों को बनाया नर्स और हुनरमंद डॉ. बुधरी ताती का काम सिर्फ ककहरा सिखाने तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने आदिवासी महिलाओं को आर्थिक रूप से सक्षम बनाने के लिए सिलाई-कढ़ाई, हस्तशिल्प और स्थानीय हुनर का प्रशिक्षण देना शुरू किया। उनके इन जमीनी प्रयासों का ही नतीजा है कि आज बस्तर की कई आदिवासी बेटियां देश-प्रदेश के विभिन्न अस्पतालों में नर्स के रूप में सेवाएं दे रही हैं और आत्मनिर्भर बनकर अपने पैरों पर खड़ी हैं। स्वास्थ्य सेवा, नशामुक्ति और बालिकाओं के अधिकारों के लिए लड़ा गया उनका यह संघर्ष आज देश के सर्वोच्च मंच पर सम्मानित हुआ है।

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