CG High Court decision on teachers : शिक्षकों को नहीं मिलेगा BEO जैसे प्रशासनिक पदों का प्रभार, व्याख्याता को हटाने का आदेश

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बिलासपुर। छत्तीसगढ़ स्कूल शिक्षा विभाग की प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक बेहद अहम और दूरगामी फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने साफ कर दिया है कि शिक्षण संवर्ग (Teaching Cadre) के कर्मचारियों या शिक्षकों को ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (BEO) जैसे प्रशासनिक पदों का प्रभार नहीं दिया जा सकता। इसी आधार पर कोर्ट ने बलौदा के बीईओ (BEO) का अतिरिक्त प्रभार एक व्याख्याता को देने के सरकारी आदेश को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया है।

RTE का हवाला: शिक्षकों से नहीं करा सकते गैर-शैक्षणिक कार्य

न्यायमूर्ति बी.डी. गुरु की एकलपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE), 2009 में निर्धारित विशेष परिस्थितियों को छोड़कर शिक्षकों से किसी भी तरह का गैर-शैक्षणिक कार्य नहीं कराया जा सकता।

हाईकोर्ट ने कहा कि शिक्षण और प्रशासनिक संवर्ग को अलग रखने का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रशासनिक पदों पर केवल वही अधिकारी नियुक्त हों, जिनके पास इसके लिए जरूरी अनुभव, योग्यता और पात्रता हो।

क्या था पूरा मामला?

  • किसने दायर की याचिका: यह याचिका बलौदा के प्रभारी BEO रवि कुमार गौतम द्वारा दायर की थी, जो मूल रूप से सहायक ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (ABEO) के पद पर कार्यरत हैं और बीईओ की जिम्मेदारी संभाल रहे थे।

  • विवाद की वजह: इसके बावजूद विभाग द्वारा एक आदेश जारी कर पीएम श्री स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम विद्यालय के प्रभारी प्राचार्य एवं व्याख्याता अनिल कुमार शर्मा को BEO का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया गया था।

  • कोर्ट की टिप्पणी: सुनवाई के दौरान यह बात सामने आई कि अनिल कुमार शर्मा मूल रूप से व्याख्याता (शिक्षण संवर्ग) हैं। उन्हें केवल प्रभारी प्राचार्य का अतिरिक्त दायित्व मिला था, जिससे उनका संवर्ग प्रशासनिक नहीं हो जाता। ऐसे में उन्हें BEO का प्रभार देना सेवा नियमों के सरासर विपरीत है।

नियम क्या कहते हैं?

कोर्ट ने नियमों की व्याख्या करते हुए स्पष्ट किया कि ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (BEO) का पद विशुद्ध रूप से प्रशासनिक संवर्ग का है। छत्तीसगढ़ स्कूल शिक्षा सेवा (शैक्षणिक संवर्ग) भर्ती एवं पदोन्नति नियम, 2026 के तहत:

  1. BEO के 75% पद सहायक ब्लॉक शिक्षा अधिकारियों (ABEO) की पदोन्नति से भरे जाते हैं।

  2. शेष 25% पद पात्र प्राचार्यों (Principals) के माध्यम से भरे जाने का प्रावधान है।

इस नियम के तहत किसी भी व्याख्याता (Lecturer) को सीधे प्रशासनिक पद का प्रभार देना पूरी तरह गलत है।

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