8 जुलाई 2026 छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा विवाहित महिलाओं के आर्थिक स्वावलंबन के लिए चलाई जा रही महत्वाकांक्षी महतारी वंदन योजना में सिस्टम की एक बेहद गंभीर और हैरान करने वाली लापरवाही सामने आई है। खैरागढ़ जिले के मुढ़ीपार में एक पुरुष ने महिला बनकर साल भर तक योजना का लाभ लिया और अपने खाते में ₹12,000 डलवा लिए। इस बड़ी चूक का खुलासा तब हुआ जब योजना के तहत e-KYC (केवाईसी) प्रक्रिया शुरू की गई।
मामले की गंभीरता को देखते हुए खैरागढ़ कलेक्टर इंद्रजीत चटवाल ने उच्च स्तरीय जांच के आदेश दे दिए हैं।
खुद को बताया महिला, आवेदन में पति का नाम भी ‘त्रिलोक साहू’
मिली जानकारी के अनुसार, मुढ़ीपार निवासी आरोपी त्रिलोक साहू खुद एक कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) का संचालक है। जब योजना का पोर्टल शुरू हुआ, तो उसने अपनी तकनीकी पहुंच का फायदा उठाते हुए खुद को महिला बताकर आवेदन सबमिट कर दिया।
हैरानी की बात यह है कि आवेदन फॉर्म में हितग्राही (लाभार्थी) का नाम भी ‘त्रिलोक साहू’ दर्ज था और पति के नाम वाले कॉलम में भी ‘त्रिलोक साहू’ ही लिखा हुआ था। इसके बावजूद सिस्टम में बैठे जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों को इस पर कोई आपत्ति नहीं सूझी।
आंगनबाड़ी और सुपरवाइजर की बड़ी लापरवाही, अब तक ₹10,000 वसूले
यह पूरा मामला खैरागढ़ परियोजना के मुढ़ीपार सेक्टर का है। डिजिटल रिकॉर्ड खंगालने पर पता चला कि इस फर्जी आवेदन को पहले आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ने और फिर उसके बाद सेक्टर सुपरवाइजर ने अपनी जांच में ‘सत्यापित’ (Verified) मार्क किया था।
केवाईसी के दौरान चोरी पकड़े जाने के बाद वर्तमान में इस आवेदन का स्टेटस ‘परमानेंट होल्ड’ कर दिया गया है। प्रशासन का दावा है कि आरोपी के खाते से अब तक ₹10,000 की वसूली की जा चुकी है।
कलेक्टर ने दिए जांच के आदेश, सिस्टम पर उठे सवाल
कलेक्टर इंद्रजीत चटवाल ने इसे मैदानी अमले की ‘बड़ी चूक’ करार देते हुए खैरागढ़ परियोजना अधिकारी रंजना श्रीवास्तव को पूरे मामले की बारीकी से जांच करने के निर्देश दिए हैं। हालांकि, आरोपी त्रिलोक साहू के खिलाफ अभी तक पुलिस में कोई आपराधिक मामला (FIR) दर्ज नहीं कराया गया है, लेकिन लापरवाही बरतने वाली आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सुपरवाइजर को तलब कर पूछताछ की जा रही है।
केवल महिलाओं के लिए आरक्षित इस योजना में एक पुरुष द्वारा सेंध लगाने की इस घटना ने सरकारी सत्यापन और स्क्रूटनी सिस्टम की पोल खोल कर रख दी है।
