रायपुर। छत्तीसगढ़ के खेल प्रेमियों और क्रिकेट प्रशंसकों के लिए एक बड़ा झटका है। नया रायपुर स्थित शहीद वीर नारायण सिंह अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम अब नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के निशाने पर आ गया है। एनजीटी ने रायपुर समेत देश के तीन बड़े स्टेडियमों में खेल गतिविधियों पर अंतरिम रोक लगा दी है। मैदानों में हो रही लाखों लीटर पानी की बर्बादी और एनजीटी के नोटिस को नजरअंदाज करना इन स्टेडियमों को भारी पड़ गया।
रायपुर के अलावा मुंबई के डी.वाई. पाटिल और जयपुर के सवाई मानसिंह स्टेडियम पर भी यह गाज गिरी है। अब जब तक एनजीटी की हरी झंडी नहीं मिलती, तब तक रायपुर स्टेडियम में किसी भी मैच या बड़े इवेंट का आयोजन नहीं हो सकेगा।
क्यों लिया NGT ने यह कड़ा फैसला?
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नोटिस का जवाब न देना पड़ा भारी: एनजीटी ने अप्रैल महीने में देश के 6 प्रमुख स्टेडियमों से जल प्रबंधन को लेकर रिपोर्ट मांगी थी। दिल्ली के अरुण जेटली और लखनऊ के इकाना स्टेडियम ने अपना पक्ष रख दिया, जबकि कटक के बाराबती स्टेडियम ने समय मांगा। लेकिन रायपुर, मुंबई और जयपुर के स्टेडियम प्रबंधन ने नोटिस का जवाब देने तक की जहमत नहीं उठाई।
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भूजल (Groundwater) का अंधाधुंध दोहन: अधिकरण (Tribunal) ने नाराजगी जताते हुए कहा कि इन स्टेडियमों में रेन वॉटर हार्वेस्टिंग और पानी को रिसाइकिल (Recycle) करने की कोई सही व्यवस्था नहीं है। पिचों और आउटफील्ड को हरा-भरा रखने के लिए सीधे जमीन से लाखों लीटर पानी खींचा जा रहा है, जो जल संकट के इस दौर में गंभीर लापरवाही है।
17 अगस्त को होगी अगली सुनवाई
सूत्रों के मुताबिक, एनजीटी इन स्टेडियमों के जल संरक्षण के तरीकों से बेहद खफा है। इस पूरे मामले की अगली सुनवाई अब 17 अगस्त को तय की गई है। तब तक रायपुर स्टेडियम प्रबंधन को एनजीटी के कड़े सवालों का जवाब तैयार करना होगा और जल संरक्षण के पुख्ता इंतजामों का ब्लूप्रिंट पेश करना होगा, तभी यहां दोबारा क्रिकेट की बहाली हो पाएगी।
