लोरमी/बिलासपुर: बिलासपुर के प्रतिष्ठित अपोलो अस्पताल की मनमानी और नियमों के उल्लंघन का मामला अब दिल्ली तक पहुंच गया है। स्वास्थ्य विभाग की छापामार कार्रवाई के बाद अब केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू ने सीधे केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा को पत्र लिखकर अस्पताल के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
केंद्रीय मंत्री ने आरोप लगाया है कि अस्पताल प्रबंधन सरकारी योजनाओं का लाभ गरीबों को नहीं दे रहा है और अपनी मनमानी पर उतारू है।
केंद्रीय मंत्री तोखन साहू का बड़ा कदम
लोरमी प्रवास के दौरान केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू ने मीडिया से चर्चा करते हुए कहा कि शासन की हर योजना का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने बताया:
योजनाओं से वंचित गरीब: छत्तीसगढ़ समेत अन्य राज्यों से आने वाले मरीजों को आयुष्मान भारत और खूबचंद बघेल स्वास्थ्य योजना का लाभ नहीं दिया जा रहा है।
आर्थिक और मानसिक शोषण: इलाज न मिलने से गरीब परिवारों को भारी मानसिक और आर्थिक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
कड़ी कार्रवाई की मांग: केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा से इस मामले में अपोलो अस्पताल के खिलाफ कड़े निर्देश जारी करने की मांग की गई है।
दो दिन पहले स्वास्थ्य विभाग ने मारा था छापा
आपको बता दें कि नियमों के उल्लंघन की शिकायतों के बाद 11 जुलाई को रायपुर और बिलासपुर के स्वास्थ्य अधिकारियों की एक संयुक्त टीम ने अपोलो अस्पताल में औचक दबिश दी थी।
टीम ने मरीजों के इलाज से जुड़े दस्तावेज, भर्ती और उपचार की प्रक्रिया खंगाली।
अस्पताल के चिकित्सा रिकॉर्ड के साथ-साथ आय-व्यय (फाइनेंशियल रिकॉर्ड्स) का भी बारीकी से परीक्षण किया गया।
लापरवाही की हद: एयर एंबुलेंस तैयार थी, पर अस्पताल ने नहीं दी अपनी गाड़ी!
अस्पताल प्रबंधन पर एक गंभीर मरीज के इलाज और रेफरल प्रक्रिया में लापरवाही के बेहद संगीन आरोप लगे हैं।
क्या है पूरा मामला?
मरीज की हालत बिगड़ी: PWD विभाग में कार्यरत राजकुमार अग्रवाल कोलकाता यात्रा से लौटने के बाद बीमार हुए और उन्हें अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया। बुधवार को डॉक्टरों ने उन्हें हायर सेंटर रेफर करने की सलाह दी।
13 लाख में बुक की एयर एंबुलेंस: परिजनों ने आनन-फानन में ₹13 लाख खर्च कर हैदराबाद के लिए एयर एंबुलेंस बुक की, जो बुधवार शाम 7 बजे चकरभाठा एयरपोर्ट पहुंच भी गई।
अस्पताल प्रबंधन का अमानवीय रवैया: आरोप है कि अस्पताल परिसर में एंबुलेंस खड़ी होने के बावजूद मरीज को एयरपोर्ट ले जाने के लिए गाड़ी नहीं दी गई। परिजनों को निजी एंबुलेंस की व्यवस्था करने को कहा गया।
बिना स्टाफ के भेजा: मरीज के साथ न तो कोई डॉक्टर भेजा गया और न ही कोई प्रशिक्षित मेडिकल स्टाफ। नतीजा यह हुआ कि एयरपोर्ट पहुंचते ही मरीज की तबीयत बिगड़ गई और हैदराबाद की टीम ने उन्हें ले जाने से इनकार कर दिया। मरीज को वापस अपोलो लाना पड़ा।
अगले दिन मिली राहत: गुरुवार को हैदराबाद से 3 सदस्यीय विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम विशेष लंग्स सपोर्ट सिस्टम के साथ बिलासपुर पहुंची। गुरुवार शाम करीब 7 बजे (एक दिन की देरी से) मरीज को दोबारा निजी एंबुलेंस के जरिए एयरपोर्ट ले जाया गया और हैदराबाद रवाना किया गया।