रायपुर | छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के पहले दिन प्रश्नकाल के दौरान गांवों के बंदोबस्त (Settlement) का मुद्दा गरमाया। सदन में कांग्रेस विधायक जनक ध्रुव के सवाल का जवाब देते हुए राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने एक बड़ा खुलासा किया। मंत्री ने बताया कि छत्तीसगढ़ गठन (साल 2000) के बाद से अब तक प्रदेश के 746 गांव असर्वेक्षित हैं, यानी यहाँ बंदोबस्त का काम नहीं हुआ है।
राजस्व मंत्री ने साफ किया कि इन गांवों में सर्वे का काम कब तक पूरा होगा, इसकी कोई निश्चित समय-सीमा तय नहीं की जा सकती।
नियम 30 साल का, लेकिन 746 गांवों में काम बाकी
सदन में प्रश्नकाल के दौरान कांग्रेस विधायक जनक ध्रुव ने पूछा था कि छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता के तहत गांवों का बंदोबस्त कितने सालों में होना अनिवार्य है? साथ ही उन्होंने राज्य गठन के बाद से अब तक छूटे हुए गांवों की जिलेवार जानकारी और इसके लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की थी।
इस पर लिखित जवाब देते हुए राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने बताया:
-
छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता के प्रावधानों के तहत किसी भी गांव का सर्वेक्षण और भू-राजस्व का निर्धारण सामान्यतः 30 साल में होना होता है।
-
प्रदेश में कुल 20,551 राजस्व ग्राम हैं, जिनमें से 19,805 गांवों का सर्वेक्षण किया जा चुका है।
-
वर्तमान में 746 ग्राम असर्वेक्षित हैं।
375 गांवों में शुरू भी नहीं हुआ सर्वे का काम
राजस्व मंत्री ने विधानसभा में बताया कि इन 746 असर्वेक्षित गांवों में से 371 गांवों में सर्वेक्षण की प्रक्रिया फिलहाल चल रही है। वहीं, 375 गांव ऐसे हैं जहाँ अभी तक सर्वे का काम शुरू भी नहीं हो सका है।
जिम्मेदारी पर मंत्री का जवाब: जब विधायक ने पूछा कि इसके लिए कौन जिम्मेदार है, तो मंत्री ने कहा कि सर्वेक्षण का कार्य चरणबद्ध रूप से स्वीकृत योजना, वित्तीय प्रावधान और तकनीकी संसाधनों की उपलब्धता के आधार पर होता है। इसलिए इस देरी के लिए किसी अधिकारी या कर्मचारी को उत्तरदायी नहीं ठहराया जा सकता।
