नई दिल्ली। ट्रेन के एसी (AC) कोच में सूट-बूट पहनकर और महंगी टिकट लेकर सफर करने वाले ‘सभ्य’ यात्रियों का एक ऐसा सच सामने आया है, जो बेहद शर्मनाक है। रेलवे की आरटीआई (RTI) रिपोर्ट और विश्वसनीय सूत्रों से मिले आंकड़े बताते हैं कि भारतीय ट्रेनों के एसी कोच से पिछले 4 वर्षों (2022 से 2026 के बीच) में यात्रियों ने 1.27 करोड़ से अधिक बेडशीट, तौलिए, कंबल और तकिए पार कर दिए।
इस शातिर और अजीबोगरीब चोरी की वजह से भारतीय रेलवे को 104.51 करोड़ रुपये से अधिक का प्रत्यक्ष वित्तीय नुकसान हुआ है।
चोरी की ‘सुपरहिट’ लिस्ट: यात्रियों ने किस पर कितना साफ किया हाथ?
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, यात्रियों को सबसे ज्यादा प्यार रेलवे के ‘तौलियों’ से है। गायब हुए सामानों का ब्यौरा इस प्रकार है:
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फेस टॉवल (छोटे तौलिए): लगभग 46.54 लाख (सबसे ज्यादा चोरी)
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बेडशीट (सफेद चादरें): लगभग 41.13 लाख
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तकिया कवर (Pillow Covers): लगभग 23.59 लाख
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कंबल (Blankets): लगभग 12.95 लाख
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तकिए (Pillows): लगभग 2.76 लाख
शर्मनाक गणित: रेलवे के एक सर्वे के अनुसार, एसी डिब्बों में सफर करने वाले हर 1,000 यात्रियों में से 1 यात्री अपने साथ रेलवे का कोई न कोई सामान (चादर, कंबल या तौलिया) बैग में दबाकर घर ले जाता है। 2022 के बाद से इस तरह की चोरियों में 56% का भारी उछाल आया है।
चोरी के ‘टॉप टेन’ रेलवे डिवीजन (बीकानेर सबसे आगे)
देश के 10 रेल डिवीजनों में सबसे ज्यादा चोरियां दर्ज की गईं, जो कुल चोरी का 67% हैं:
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बीकानेर डिवीजन: यहाँ रिकॉर्ड 25.76 लाख सामान चोरी हुए।
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रांची डिवीजन: यहाँ से 9.31 लाख बेडरोल गायब हुए।
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दिल्ली डिवीजन: यहाँ 8.21 लाख सामान चोरी हुए।
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मुंबई डिवीजन: 8.17 लाख सामानों पर हाथ साफ किया गया।
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जोधपुर डिवीजन: 8.09 लाख सामान (यहाँ सबसे ज्यादा कंबल चोरी हुए)।
राहत की बात सिर्फ इतनी है कि दक्षिण भारत के तिरुचिरापल्ली (Trichy) और पालक्काड (Palakkad) डिवीजनों में चोरी का आंकड़ा ‘शून्य’ (Zero) रहा।
इस कहानी का सबसे दर्दनाक पहलू: पिस रहे हैं गरीब ‘अटेंडेंट’
अमीर यात्रियों की इस ‘सस्ती’ हरकत का खामियाजा उन ठेका कर्मचारियों (Linen Attendants) को भुगतना पड़ रहा है, जो यात्रियों को यह सामान सौंपते हैं।
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सैलरी से कटती है रकम: नियम के अनुसार, यदि सफर खत्म होने पर कोई सामान कम पाया जाता है, तो उसकी पूरी कीमत अटेंडेंट की जेब से काटी जाती है।
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कटौती की मार: चादर गायब होने पर ₹198, कंबल के ₹343 और तौलिए के गायब होने पर ₹48 सीधे अटेंडेंट के वेतन से काट लिए जाते हैं।
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अटेंडेंट का दर्द: महज 15 से 18 हजार रुपये महीना कमाने वाले इन गरीब कर्मचारियों के वेतन से हर महीने ₹2,000 से ₹3,000 सिर्फ यात्रियों द्वारा की गई चोरी की भरपाई में कट जाते हैं।
रेलवे अब कस रहा है शिकंजा
इस बड़ी राष्ट्रीय क्षति को रोकने के लिए रेलवे अब सख्त कदम उठा रहा है। ट्रेनों में सफर खत्म होने से आधा घंटा पहले ही अटेंडेंट को सामान वापस कलेक्ट करने को कहा जा रहा है। साथ ही तकनीक और ‘कोच मित्र’ ऐप के जरिए सामान का डिजिटल हिसाब रखा जा रहा है।
