CG Assembly : CG विधानसभा में गूंजा ‘मन की बात’ का मुद्दा: बालार्जुन ताम्रपत्र की भाषा पर घिरे संस्कृति मंत्री, जांच और कार्रवाई के निर्देश

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रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान आज प्रश्नकाल में ऐतिहासिक और प्रशासनिक चूक का एक बड़ा मामला सामने आया। ज्ञान भारतम अभियान के तहत प्राचीन पांडुलिपियों और ऐतिहासिक ताम्रपत्रों के सत्यापन को लेकर कांग्रेस विधायक राघवेंद्र सिंह ने विभाग को कटघरे में खड़ा कर दिया। विवाद बिलासपुर जिले के मल्हार से प्राप्त प्रसिद्ध ‘बालार्जुन ताम्रपट्टिका’ की भाषा को लेकर हुआ, जिसके बाद संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल को सदन में जांच और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई का आश्वासन देना पड़ा।

प्रधानमंत्री के ‘मन की बात’ बनाम मंत्री का जवाब: कहाँ फंसा पेंच?

सदन में सवाल उठाते हुए कांग्रेस विधायक राघवेंद्र सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने लोकप्रिय कार्यक्रम ‘मन की बात’ में देश को बताया था कि यह ऐतिहासिक ताम्रपत्र ब्राह्मी लिपि और पाली भाषा में लिखा गया है।

लेकिन इसके विपरीत, आज सदन में विभागीय मंत्री के लिखित जवाब में कहा गया कि इसकी लिपि पेटिकाशीर्ष ब्राह्मी और भाषा संस्कृत है। विधायक ने आरोप लगाया कि जब प्रधानमंत्री देश के सामने कोई तथ्य रखते हैं, तो पूरा देश उस पर अटूट भरोसा करता है। ऐसे में मंत्री का यह जवाब देश और सदन को गुमराह करने वाला है। उन्होंने सीधे तौर पर विभाग के अधिकारियों पर गलत तथ्य पेश करने का आरोप लगाया और कार्रवाई की मांग की।

बैकफुट पर संस्कृति मंत्री, बोले- ‘दोषी अधिकारियों पर होगी कार्रवाई’

विपक्ष के तीखे तेवरों और मामले की गंभीरता को देखते हुए संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल सदन में बैकफुट पर नजर आए। उन्होंने सदन को आश्वस्त करते हुए कहा, “इस पूरे मामले में जो भी जिम्मेदार अधिकारी हैं, जिन्होंने यह विसंगतिपूर्ण जानकारी तैयार की है, हम उनके खिलाफ निश्चित रूप से जांच कर कड़ी कार्रवाई करेंगे।”

क्या है पूरा मामला और क्या हैं इसके आंकड़े?

संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल द्वारा सदन में दी गई जानकारी के अनुसार:

  • ज्ञान भारतम् अभियान: इसके तहत छत्तीसगढ़ से मोबाइल ऐप के जरिए कुल 1,24,422 पांडुलिपियों का पंजीकरण किया गया था।

  • कितने हुए सत्यापित: इनमें से केवल 12,040 पांडुलिपियों को नई दिल्ली स्थित ज्ञानभारतम केंद्र द्वारा सत्यापित किया गया है।

  • अस्वीकृत रिकॉर्ड: तकनीकी या अन्य कारणों से 1,12,382 पांडुलिपियां अस्वीकृत कर दी गई हैं।

  • क्या है बालार्जुन ताम्रपट्टिका: विवाद की मुख्य वजह बनी यह ताम्रपट्टिका बिलासपुर के मस्तूरी क्षेत्र के ऐतिहासिक स्थल मल्हार से मिली थी, जिसकी खोज वर्ष 1987 में हुई थी। वर्तमान में यह ऐतिहासिक अभिलेख मल्हार निवासी संजीव पाण्डेय के आधिपत्य में सुरक्षित है।

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