जगदलपुर/रायपुर। छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में सशस्त्र नक्सलवाद के खात्मे के दावों (मार्च 2026 में घोषित नक्सल-मुक्त भारत का लक्ष्य) के बीच अंदरूनी इलाकों से आ रही नक्सलियों की सक्रियता की खबरों ने एक बार फिर हलचल तेज कर दी है. दंतेवाड़ा, बीजापुर और सीमावर्ती महाराष्ट्र के गढ़चिरौली में नक्सलियों की मौजदूगी और पर्चेबाजी ने सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट पर ला दिया है.
कहाँ-कहाँ देखी गई नक्सलियों की हलचल?
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बीजापुर: खुफिया सूत्रों के अनुसार, कुछ दिन पहले बीजापुर के गंगालूर इलाके में नक्सलियों के एक छोटे समूह को सक्रिय देखा गया था.
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दंतेवाड़ा: जिले के कुछ संवेदनशील भीतरी क्षेत्रों में भी नक्सलियों की मूवमेंट की लगातार चर्चा है.
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इंद्रावती नदी पार: नदी के उस पार के अबूझमाड़ और सीमावर्ती इलाकों में नक्सलियों की सक्रियता की बात सामने आई है. इस मामले में बस्तर पुलिस अभी आधिकारिक तौर पर खुलकर कुछ भी कहने से बच रही है.
महाराष्ट्र सीमा पर पर्चेबाजी से बढ़ी चिंता
छत्तीसगढ़ से लगे महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले की एटापल्ली तहसील के पिपली बुर्गी गांव के पास मुख्य सड़क के किनारे नक्सलियों के बैनर-पोस्टर मिले हैं. इसके अलावा छत्तीसगढ़-महाराष्ट्र सीमा और बस्तर संभाग के कुछ भीतरी इलाकों में भी धमकी भरे पर्चे-पोस्टर मिलने की पुष्टि हुई है. इस घटना के बाद सुरक्षा व्यवस्था और दावों पर सवाल उठने लगे हैं, जिसके जवाब में पुलिस ने पूरे सीमावर्ती इलाके में सघन सर्चिंग ऑपरेशन शुरू कर दिया है.
पुलिस का दावा – ‘अंतिम चरण में है नक्सली आंदोलन’
इन सबके बीच सुरक्षा बलों का मानना है कि नक्सलियों का 40 साल पुराना आंदोलन अब अपने अंतिम और सबसे कमजोर चरण में है और उनका नेटवर्क पूरी तरह सिमट चुका है. आईजी बस्तर रेंज के अनुसार, नक्सलियों का प्रभाव अब न्यूनतम रह गया है और अब उनका बड़े पैमाने पर लौटना या पैर पसारना “अत्यंत दुर्लभ” है.
विकास की बयार: लौट रहे हैं उजड़े हुए परिवार
नक्सली गतिविधियों के समानांतर बस्तर में सुरक्षा और विकास के मोर्चे पर बड़े काम हुए हैं:
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बस्तर संभाग में नक्सलियों के कोर एरिया में 150 से अधिक नए सुरक्षा बल कैंप स्थापित किए गए हैं.
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नक्सली हिंसा के कारण सालों पहले अपना गांव छोड़कर गए परिवार अब सुरक्षित माहौल में वापस लौट रहे हैं. इन परिवारों को पीएम आवास योजना और अन्य सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का सीधा लाभ दिया जा रहा है.
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सरकार का मुख्य लक्ष्य अब प्रभावित क्षेत्रों (विशेष रूप से बस्तर) में समग्र, समावेशी और दीर्घकालिक विकास पहुंचाना है ताकि इन्हें देश की मुख्यधारा के बराबर लाया जा सके.
एनकाउंटर और सरेंडर की बड़ी तस्वीरें (आधिकारिक आंकड़े):
1. रिकॉर्ड आत्मसमर्पण (Surrender):
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जनवरी 2024 से मार्च 2026 के बीच: बस्तर संभाग में चलाए जा रहे उन्मूलन और पुनर्वास अभियानों के तहत केवल इस अवधि में 2,625 से अधिक माओवादियों ने हिंसा छोड़ मुख्यधारा में वापसी की है.
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राज्य भर का कुल आंकड़ा: बीते कुछ वर्षों में पूरे छत्तीसगढ़ में 2,800 से अधिक नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है.
2. मुठभेड़ और नुकसान (Encounter & Casualties):
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पिछले दो वर्षों में (2024 से 2026 तक): सुरक्षा बलों ने बस्तर संभाग में 500 से अधिक नक्सलियों को ढेर किया है.
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वर्षवार आंकड़े: मारे गए नक्सलियों में से अकेले वर्ष 2025 में 256 नक्सली और 2024 में 200 से अधिक नक्सली मुठभेड़ में मारे गए थे.
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जवानों की शहादत: इस कड़े संघर्ष और अभियान के दौरान हमारे 50 से अधिक सुरक्षा बल के जवान भी शहीद हुए हैं.
