नई दिल्ली: दिल्ली के जंतर-मंतर पर NEET विवाद को लेकर छात्रों के प्रदर्शन और ‘संसद चलो’ मार्च के दौरान हुई हिंसा का मामला अब देश की सर्वोच्च अदालत (Supreme Court) पहुँच गया है। प्रदर्शन के दौरान उग्र भीड़ के पथराव और हमले में घायल हुए पुलिसकर्मियों के परिजनों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर ऑन-ड्यूटी पुलिसकर्मियों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और मौलिक अधिकारों (Fundamental Rights) के संरक्षण के लिए दिशानिर्देश जारी करने की मांग की है।
“संविधान का अनुच्छेद 21 पुलिसकर्मियों पर भी लागू होता है”
याचिका में तर्क दिया गया है कि संविधान का अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार) और अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) केवल आम नागरिकों तक सीमित नहीं है, बल्कि ऑन-ड्यूटी तैनात पुलिसकर्मियों पर भी समान रूप से लागू होता है।
परिवारों ने स्पष्ट किया कि अनुच्छेद 19 नागरिकों को शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन की स्वतंत्रता ज़रूर देता है, लेकिन यह अधिकार सीमित है। किसी भी आंदोलन के नाम पर:
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सुरक्षा बैरिकेड्स तोड़ना,
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सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाना, और
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ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों पर नुकीली टाइलों व पत्थरों से हमला करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
लगभग 200 पुलिसकर्मी हुए घायल
घायल एएसपी कैलाश सिंह बिष्ट, एएसआई संदीप, कॉन्स्टेबल धीरज और एएसआई हेमेन्दर राठी के परिजनों (लक्ष्य सिंह बिष्ट, कुंजल, निशा यादव और अक्षत राठी) द्वारा संयुक्त रूप से दायर इस याचिका में बताया गया है कि हिंसा केवल 20 जुलाई तक सीमित नहीं थी।
24 और 25 जुलाई को भी उग्र भीड़ ने नुकीली टाइलों और पत्थरों से जानलेवा हमला किया। पूरे आंदोलन के दौरान घायल हुए पुलिसकर्मियों की संख्या लगभग 200 तक पहुँच गई है, जिनमें कई वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हैं।
याचिकाकर्ताओं की मांग है कि हिंसक परिस्थितियों में ड्यूटी करने वाले जवानों को पर्याप्त कानूनी, संस्थागत और चिकित्सीय सुरक्षा मिलनी चाहिए।
