रायपुर। छत्तीसगढ़ में स्मार्ट मीटरों को लेकर उपभोक्ताओं का गुस्सा चरम पर पहुंच गया है। प्रदेश भर में स्मार्ट मीटरों की गड़बड़ी और भारी-भरकम बिलों के खिलाफ लगातार शिकायतें दर्ज कराई जा रही हैं। लोग अब पुराने पारंपरिक (सामान्य) मीटर वापस लगाने के लिए बिजली दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं और लिखित आवेदन दे रहे हैं।
इसके बावजूद, बिजली कंपनी और सरकार शिकायतों का निवारण करने के बजाय स्मार्ट मीटरों का ही बचाव करने में जुटी हुई है। इसे लेकर प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) के मुख्य प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने भाजपा सरकार और बिजली विभाग को कटघरे में खड़ा किया है।
“सरकार किसके दबाव में दबा रही जनता की आवाज?”
कांग्रेस प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए पूछा कि जब उपभोक्ता खुद परेशान होकर खराब मीटर बदलने की मांग कर रहे हैं, तो आखिर सरकार और बिजली विभाग किसके दबाव में जनता की आवाज को दबाने का काम कर रहे हैं?
कांग्रेस ने राज्य सरकार से सीधे 4 तीखे सवाल किए हैं:
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जांच रिपोर्ट पर सवाल: अगर स्मार्ट मीटर पूरी तरह सही हैं, तो टेस्ट मीटर की जांच में इतना बड़ा अंतर क्यों आया?
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वसूली का जरिया: क्या स्मार्ट मीटर जनता की सुविधा के लिए लगाए गए हैं या यह सिर्फ बिजली कंपनी की अवैध वसूली बढ़ाने का जरिया बन चुके हैं?
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कंपनी से क्या संबंध: स्मार्ट मीटर लगाने वाली निजी कंपनियों के साथ सरकार का क्या संबंध है?
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राजनीतिक लाभ: क्या इस पूरी योजना और फैसले के पीछे कोई बड़ा राजनीतिक लाभ जुड़ा हुआ है?
“हठधर्मिता छोड़े सरकार, तुरंत हटाए जाएं खराब मीटर”
अन्य भाजपा शासित राज्यों का उदाहरण देते हुए कांग्रेस ने कहा कि कई राज्यों में भारी जनविरोध के बाद वहां की सरकारों को स्मार्ट मीटर नीति पर पुनर्विचार करना पड़ा है।
प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने मांग की है कि साय सरकार अपनी हठधर्मिता छोड़े और छत्तीसगढ़ के उपभोक्ताओं की समस्याओं को गंभीरता से ले। पार्टी ने तत्काल प्रभाव से:
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सभी खराब और संदिग्ध स्मार्ट मीटरों को हटाने,
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उपभोक्ताओं के घरों में दोबारा पारंपरिक सामान्य मीटर लगाने, और
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बिजली बिलिंग में पूरी तरह पारदर्शी व्यवस्था लागू करने की मांग की है।
