रायपुर/नई दिल्ली। देश के रेलवे नेटवर्क को आधुनिक बनाने और आवागमन को रफ्तार देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में कई ऐतिहासिक फैसलों को हरी झंडी दिखाई गई है। कैबिनेट ने देश के 7 हाई-डेंसिटी (अत्यधिक भीड़भाड़ वाले) रेल कॉरिडोर्स को 4-लाइन बनाने की मंजूरी दे दी है।
इस मेगा प्लान में छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश को विशेष प्राथमिकता में रखा गया है, जिससे सरगुजा और बिलासपुर संभाग के यात्रियों के साथ-साथ माल ढुलाई में अभूतपूर्व बदलाव देखने को मिलेगा।
छत्तीसगढ़ और MP के लिए क्या है खास?
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार:
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बिलासपुर (उस्लापुर) से पेंड्रा रोड: इस व्यस्त मार्ग के बीच तीसरी लाइन के विस्तारीकरण का काम तेजी से पूरा किया जाएगा।
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पेंड्रा रोड से कटनी: इस पूरे खंड को फोर-लेन (4-लाइन) में तब्दील करने की मंजूरी दी गई है।
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कटनी तक फोर-लेन प्लान: भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए पूरे उस्लापुर-कटनी रूट को पूरी तरह से फोर-लेन में तब्दील करने की रणनीति तैयार की गई है।
देश के 7 बड़े हाई-डेंसिटी कॉरिडोर्स बनेंगे 4-लाइन
कैबिनेट ने देश के प्रमुख महानगरों और आर्थिक केंद्रों को जोड़ने वाले 7 मुख्य रेल रूटों को 4-लाइन बनाने का फैसला किया है:
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दिल्ली से हावड़ा (कोलकाता) – उत्तर और पूर्वी भारत के बीच यात्रा और माल ढुलाई होगी तेज।
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दिल्ली से मुंबई – देश की प्रशासनिक और आर्थिक राजधानी के बीच निर्बाध सफर।
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हावड़ा से चेन्नई – पूर्वी और दक्षिणी तटीय क्षेत्रों को मिलेगी बेहतर कनेक्टिविटी।
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मुंबई से चेन्नई – पश्चिम और दक्षिण भारत के औद्योगिक केंद्रों के बीच रेल रफ्तार।
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दिल्ली से चेन्नई – उत्तर से दक्षिण भारत का सीधा और सुगम संपर्क।
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दिल्ली से गुवाहाटी – पूर्वोत्तर भारत के राज्यों के लिए लाइफलाइन साबित होगा।
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मुंबई से हावड़ा – मध्य भारत से होते हुए पूर्व-पश्चिम का जुड़ाव।
आम जनता और अर्थव्यवस्था को मिलेंगे 4 बड़े फायदे
रेलवे के इस आधुनिकीकरण और विस्तारीकरण प्रोजेक्ट से देश को सीधा लाभ मिलेगा:
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4,790 गांवों को कनेक्टिविटी: नए रूट और लाइनों के विस्तार से देश के लगभग 4,790 गांव सीधे रेलवे नेटवर्क से जुड़ जाएंगे।
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56 लाख अतिरिक्त यात्री: ट्रेनों की संख्या और क्षमता बढ़ने से रोजाना 56 लाख से अधिक अतिरिक्त यात्री सफर कर सकेंगे।
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27 मिलियन मीट्रिक टन कार्गो: मालगाड़ियों की गति और क्षमता बढ़ने से सालाना 27 मीट्रिक टन अतिरिक्त माल ढुलाई (Cargo Transport) संभव हो सकेगी।
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समय और ईंधन की बचत: रूट्स फोर-लेन होने से सिग्नलिंग और ट्रेनों की क्रॉसिंग में लगने वाला समय काफी बचेगा, जिससे सफर का समय घट जाएगा।
