KBC 18 Contestant Uddeshya Sachan Story: कभी आर्थिक परेशानी के कारण स्कूल से बाहर कर दिए गए कानपुर के उद्देश्य सचान ने अपनी जिंदगी के संघर्ष को कमजोरी नहीं, बल्कि दूसरों की मदद का जरिया बना लिया। 27 वर्षीय उद्देश्य ने ऐसा स्कूल शुरू किया, जहां आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को बिना फीस के शिक्षा दी जाती है। उनकी यह प्रेरणादायक कहानी अब ‘कौन बनेगा करोड़पति 18’ (KBC 18) के मंच तक पहुंची। अमिताभ बच्चन के सामने हॉट सीट पर बैठे उद्देश्य सचान ने अपने संघर्ष और शिक्षा के प्रति अपने मिशन के बारे में बताया। शो में उन्होंने शानदार खेल दिखाते हुए 25 लाख रुपये के सवाल तक का सफर तय किया, लेकिन जवाब को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नहीं होने के कारण उन्होंने जोखिम लेने के बजाय गेम क्विट करने का फैसला किया। उद्देश्य अपने साथ 12.5 लाख रुपये की राशि लेकर लौटे।
फीस नहीं भर पाए तो दो बार स्कूल से हुए बाहर
उद्देश्य सचान की कहानी की सबसे खास बात उनका अपना बचपन है। आर्थिक परिस्थितियों के चलते उन्हें स्कूल की फीस जमा करने में परेशानी हुई और इसी वजह से उन्हें दो बार स्कूल से बाहर होना पड़ा।इस अनुभव ने उद्देश्य के मन पर गहरा असर डाला। उन्होंने तय किया कि जिस परेशानी से उन्हें गुजरना पड़ा, उसका सामना किसी दूसरे बच्चे को नहीं करना चाहिए। इसी सोच के साथ उन्होंने जरूरतमंद बच्चों को मुफ्त शिक्षा उपलब्ध कराने की दिशा में कदम बढ़ाया।
मां से मिले 250 रुपये से शुरू हुई पहल
उद्देश्य ने अपनी इस पहल की शुरुआत बेहद सीमित संसाधनों के साथ की। बताया गया कि उनकी मां ने उन्हें शुरुआत के लिए 250 रुपये दिए थे। इसी छोटी सी रकम से उन्होंने अपने शिक्षा अभियान की नींव रखी। धीरे-धीरे यह प्रयास बढ़ता गया और आज यह जरूरतमंद बच्चों के लिए मुफ्त स्कूल के रूप में सामने आया है। उद्देश्य का लक्ष्य ऐसे बच्चों को पढ़ाई का अवसर देना है, जिनके परिवार आर्थिक मजबूरियों के कारण शिक्षा का खर्च उठाने में सक्षम नहीं हैं।
KBC में 25 लाख के सवाल ने रोक दिया कदम
‘कौन बनेगा करोड़पति 18’ के गुरुवार के एपिसोड में उद्देश्य सचान ने 25 लाख रुपये के सवाल तक पहुंचकर दर्शकों का ध्यान खींचा। उनसे पूछा गया—
प्राचीन भारत के किस शासक को ‘अमित्रघात’ की उपाधि से भी जाना जाता था?
सवाल के विकल्प थे:
– सम्राट अशोक
– बिंबिसार
– समुद्रगुप्त
– बिंदुसार
सही उत्तर को लेकर दुविधा होने पर उद्देश्य ने पहले महाफ्लिप लाइफलाइन का इस्तेमाल किया। इसके बाद उन्होंने 50:50 लाइफलाइन भी ली। लाइफलाइन के बाद केवल बिंबिसार और बिंदुसार दो विकल्प रह गए।
हालांकि इसके बावजूद उद्देश्य पूरी तरह निश्चित नहीं हो सके। उन्होंने लाखों रुपये की रकम दांव पर लगाने के बजाय खेल छोड़ने का फैसला किया और 12.5 लाख रुपये की धनराशि सुरक्षित कर ली।
गेम छोड़ने के बाद बताया सही जवाब
KBC में उद्देश्य के फैसले ने उस समय दिलचस्प मोड़ लिया, जब गेम छोड़ने के बाद उनसे पूछा गया कि अगर उन्हें अनुमान लगाना हो तो वह किस विकल्प को चुनेंगे।
उद्देश्य ने बिंदुसार का नाम लिया। यही इस सवाल का सही उत्तर था। यानी वह सही जवाब तक पहुंच गए थे, लेकिन अनिश्चितता के कारण उन्होंने जोखिम न उठाना ही बेहतर समझा।
कौन थे बिंदुसार, जिन्हें कहा जाता था ‘अमित्रघात’?
बिंदुसार मौर्य साम्राज्य के दूसरे शासक माने जाते हैं। वह चंद्रगुप्त मौर्य के पुत्र और सम्राट अशोक के पिता थे। इतिहास में उनके शासनकाल को लगभग 297 ईसा पूर्व से 273 ईसा पूर्व के बीच माना जाता है।
बिंदुसार को ‘अमित्रघात’ की उपाधि से भी जोड़ा जाता है। संस्कृत में ‘अमित्र’ का अर्थ शत्रु और ‘घात’ का अर्थ मारना या नष्ट करना माना जाता है। इस तरह ‘अमित्रघात’ का अर्थ शत्रुओं का संहार करने वाला बताया जाता है।
प्राचीन यूनानी स्रोतों में भी बिंदुसार के लिए Amitrochates नाम का उल्लेख मिलता है, जिसे इसी उपाधि का यूनानी रूप माना जाता है।
12.5 लाख की जीत से ज्यादा चर्चा में आया उद्देश्य का मिशन
KBC 18 में उद्देश्य सचान की 12.5 लाख रुपये की जीत निश्चित रूप से खास रही, लेकिन उनकी कहानी का सबसे प्रेरक पहलू उनका शिक्षा अभियान है। जिस बच्चे ने कभी फीस के अभाव में स्कूल से बाहर होने का दर्द झेला, उसी ने आगे चलकर गरीब और जरूरतमंद बच्चों को मुफ्त शिक्षा देने का रास्ता चुना। अमिताभ बच्चन के सामने KBC के मंच पर पहुंची उद्देश्य की कहानी यह बताती है कि व्यक्तिगत संघर्ष अगर सही दिशा में इस्तेमाल किया जाए, तो वह किसी और की जिंदगी बदलने की वजह भी बन सकता है।
