नई दिल्ली। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भारत दौरे को लेकर लंबे समय से चल रही अटकलों पर अब विराम लग गया है। चीन के विदेश मंत्रालय ने 10 सितंबर 2026 को आधिकारिक पुष्टि की कि राष्ट्रपति शी जिनपिंग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाले 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में शामिल होंगे। शी जिनपिंग का यह भारत दौरा कई मायनों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। करीब सात साल बाद वह भारत आ रहे हैं। उनकी पिछली भारत यात्रा 2019 में हुई थी। इस बार BRICS Summit के मंच पर उनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक भी प्रस्तावित है, जिसमें भारत-चीन संबंधों के कई अहम पहलुओं पर बातचीत होने की संभावना है।
27 अगस्त को बीजिंग में क्या हुआ?
शी जिनपिंग की यात्रा की आधिकारिक घोषणा भले ही 10 सितंबर को हुई, लेकिन यात्रा की तैयारियां इससे काफी पहले शुरू हो चुकी थीं। रिपोर्ट के मुताबिक, 27 अगस्त को बीजिंग की ओर से शी जिनपिंग के साथ आने वाले प्रतिनिधिमंडल के वीजा के लिए भारतीय पक्ष को औपचारिक अनुरोध भेजा गया था। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इस अनुरोध से संकेत मिलता है कि चीन ने शी जिनपिंग की भारत यात्रा की तैयारियां सार्वजनिक घोषणा से कई सप्ताह पहले ही शुरू कर दी थीं। रिपोर्टों में प्रतिनिधिमंडल से जुड़े 67 लोगों के वीजा अनुरोध का भी उल्लेख किया गया है। इससे यह स्पष्ट होता है कि सार्वजनिक घोषणा में देरी को यात्रा की तैयारी में देरी नहीं माना जा सकता। प्रशासनिक और कूटनीतिक स्तर पर तैयारियां पहले से चल रही थीं।
आखिर यात्रा की घोषणा देर से क्यों हुई?
शी जिनपिंग के भारत दौरे की औपचारिक घोषणा अपेक्षाकृत देर से होने के बाद कूटनीतिक हलकों में कई सवाल उठे। हालांकि, 27 अगस्त को वीजा प्रक्रिया शुरू होना इस बात का संकेत है कि चीन और भारत के बीच यात्रा को लेकर आवश्यक समन्वय पहले से जारी था। यानी सार्वजनिक तौर पर पुष्टि बाद में हुई, लेकिन पर्दे के पीछे यात्रा से जुड़ी व्यवस्थाएं काफी पहले शुरू हो चुकी थीं। चीन के विदेश मंत्रालय ने अंततः 10 सितंबर को स्पष्ट किया कि शी जिनपिंग 12–13 सितंबर को नई दिल्ली में BRICS Summit में भाग लेंगे।
मोदी-शी मुलाकात में किन मुद्दों पर होगी बात?
BRICS Summit के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय वार्ता पर सभी की नजरें रहेंगी। रिपोर्टों के अनुसार, दोनों नेताओं की बातचीत में व्यापार और सीमा से जुड़े मुद्दे प्रमुख हो सकते हैं।
संभावित एजेंडे में ये मुद्दे शामिल हो सकते हैं—
– भारत-चीन व्यापार में असंतुलन
– भारतीय बाजार तक बेहतर पहुंच
– निवेश और कारोबारी सहयोग
– सप्लाई चेन को मजबूत करना
– सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता
– दोनों देशों के बीच भरोसा बढ़ाना
– द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों को आगे बढ़ाना
– सीमा संबंधी लंबित मुद्दों पर संवाद
हालांकि, विशेषज्ञों के मुताबिक किसी एक बैठक से सभी विवादों का समाधान संभव नहीं है। ऐसे में बातचीत का महत्व दोनों देशों के बीच लगातार संवाद और भरोसे की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में ज्यादा हो सकता है।
2020 के बाद बिगड़े थे भारत-चीन संबंध
भारत और चीन के रिश्तों में 2020 में पूर्वी लद्दाख में सैन्य गतिरोध के बाद बड़ा तनाव पैदा हुआ था। सीमा पर लंबे समय तक दोनों देशों की सेनाएं आमने-सामने रहीं। इसके बाद सैन्य और कूटनीतिक स्तर पर लगातार बातचीत के जरिए तनाव कम करने के प्रयास किए गए। अगस्त 2026 में दोनों देशों के बीच सीमा विवाद पर 25वें विशेष प्रतिनिधि स्तर के संवाद में भी सीमा पर शांति, तनाव कम करने और दीर्घकालिक समाधान की दिशा में बातचीत हुई थी।
कजान के बाद फिर आमने-सामने होंगे मोदी और शी
भारत-चीन संबंधों में सुधार की प्रक्रिया को गति अक्टूबर 2024 में मिली थी, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग की रूस के कजान में BRICS सम्मेलन के दौरान मुलाकात हुई थी। इसके बाद दोनों देशों के बीच संपर्क और सीमा संबंधी संवाद को आगे बढ़ाने की कोशिशें हुईं। अब नई दिल्ली में होने वाली संभावित मोदी-शी बैठक को उसी प्रक्रिया की अगली महत्वपूर्ण कड़ी के तौर पर देखा जा रहा है।
सात साल बाद भारत आ रहे हैं शी जिनपिंग
शी जिनपिंग की पिछली भारत यात्रा 2019 में हुई थी। उसके बाद 2020 के सीमा तनाव ने दोनों देशों के रिश्तों को गंभीर रूप से प्रभावित किया। ऐसे में 2026 में उनका भारत आना केवल BRICS Summit में भागीदारी तक सीमित नहीं है। यह यात्रा ऐसे समय हो रही है जब दोनों देश तनाव कम करने और उच्चस्तरीय संवाद को फिर से मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं।
BRICS Summit 2026 में क्या करेंगे शी जिनपिंग?
नई दिल्ली में 12 और 13 सितंबर को होने वाले 18वें BRICS Summit में शी जिनपिंग अन्य सदस्य देशों के नेताओं के साथ विभिन्न वैश्विक मुद्दों पर चर्चा करेंगे। चीन के विदेश मंत्रालय ने उनकी भागीदारी की आधिकारिक पुष्टि की है। BRICS के मंच पर वैश्विक अर्थव्यवस्था, व्यापार, विकास, बहुपक्षवाद, ग्लोबल साउथ और अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था जैसे विषयों पर चर्चा महत्वपूर्ण रहने की संभावना है। भारत की BRICS अध्यक्षता में आयोजित हो रहे इस सम्मेलन में समूह के आर्थिक सहयोग और वैश्विक भूमिका को मजबूत करने से जुड़े मुद्दे भी प्रमुख रहेंगे।
चीन के लिए BRICS 2026 क्यों महत्वपूर्ण?
BRICS के विस्तार के बाद समूह का वैश्विक आर्थिक और रणनीतिक महत्व बढ़ा है। भारत की अध्यक्षता में होने वाले इस सम्मेलन में शी जिनपिंग की मौजूदगी चीन के लिए अपने आर्थिक और वैश्विक एजेंडे को आगे बढ़ाने का महत्वपूर्ण अवसर होगी। वहीं भारत के लिए भी BRICS Summit बड़ी शक्तियों और ग्लोबल साउथ के देशों के साथ अपने संबंधों को मजबूत करने का अहम मंच है।
भारत-चीन रिश्तों में क्या बदलेगा?
शी जिनपिंग के भारत दौरे से दोनों देशों के संबंधों में तुरंत कोई बड़ा बदलाव या समझौता होने की उम्मीद करना जल्दबाजी होगी। भारत और चीन के बीच सीमा, व्यापार, निवेश और रणनीतिक भरोसे से जुड़े कई मुद्दे अभी भी चुनौती बने हुए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, हाल के वर्षों में दोनों देशों के बीच राजनयिक रिश्तों में कुछ नरमी आई है, लेकिन कारोबारी संबंधों में अभी भी नियामकीय बाधाओं और आपसी अविश्वास जैसी चुनौतियां मौजूद हैं। इसलिए मोदी-शी बैठक को सबसे ज्यादा संवाद बढ़ाने, तनाव कम रखने और लंबित मुद्दों पर आगे की राह तलाशने के नजरिए से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
