Chhattisgarh Sakti Latest News: सक्ती। पी.एम. श्री जवाहर नवोदय विद्यालय, चिस्दा के कर्मचारियों ने विद्यालय के उप-प्राचार्य अरविन्द कुमार जायसवाल के खिलाफ जिला कलेक्टर को शिकायत सौंपकर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। कर्मचारियों ने कथित रूप से बार-बार नौकरी से निकालने की धमकी देने, अभद्र एवं अशोभनीय भाषा का प्रयोग करने और दैनिक आवश्यक सुविधाओं से वंचित किए जाने की शिकायत की है। यह शिकायत 6 अक्टूबर 2026 को जिला प्रशासन को सौंपी गई।
कर्मचारियों का आरोप है कि वे पिछले कई वर्षों से विद्यालय में कार्यरत हैं और उप-प्राचार्य अरविन्द कुमार जायसवाल के पदस्थ होने के बाद से उन्हें विभिन्न समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। शिकायत के अनुसार, कर्मचारियों को कथित तौर पर बार-बार नौकरी से निकालने की धमकी दी जाती है और प्राचार्य कक्ष में बुलाकर अपमानजनक एवं अशोभनीय शब्दों का इस्तेमाल किया जाता है।
शिकायत में कर्मचारियों ने निर्धारित कार्य के अलावा अतिरिक्त और मनमाने काम कराए जाने का भी आरोप लगाया है। उनका कहना है कि सुरक्षा कर्मियों से 12 घंटे तक काम कराने के साथ फावड़ा चलाने, घास की सफाई और पौधों से संबंधित कार्य भी कराए जाते हैं। कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि काम करने के बावजूद उन्हें दबाव और धमकियों का सामना करना पड़ता है।
इसके अलावा कर्मचारियों ने विद्यालय परिसर में भोजन करने और नहाने जैसी मूलभूत सुविधाओं के उपयोग से रोके जाने का भी आरोप लगाया है। कर्मचारियों का कहना है कि वे लंबे समय से जिम्मेदारी के साथ अपने कार्यों का निर्वहन कर रहे हैं, लेकिन कथित अपमानजनक व्यवहार और सुविधाओं की कमी के कारण वे मानसिक दबाव में हैं।
कर्मचारियों ने जिला कलेक्टर से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, संबंधित कर्मचारियों के बयान दर्ज करने और सम्मानजनक एवं सुरक्षित कार्य वातावरण उपलब्ध कराने की मांग की है। उन्होंने यह भी कहा है कि यदि किसी कर्मचारी के काम में कमी है तो उसे लिखित रूप से बताया जाए, ताकि संबंधित कर्मचारी अपनी कार्यप्रणाली में सुधार कर सके।
शिकायत पत्र में कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि लगातार बनी परिस्थितियों के कारण वे 7 अक्टूबर 2026 को बंद यानी हड़ताल करने का निर्णय लेने की स्थिति में पहुंच गए हैं। हालांकि कर्मचारियों ने स्पष्ट किया है कि उनका उद्देश्य विद्यालय के कामकाज को प्रभावित करना नहीं, बल्कि सम्मानजनक वातावरण में अपने दायित्वों का निर्वहन करना है।
फिलहाल कर्मचारियों की शिकायत के बाद जिला प्रशासन की ओर से कार्रवाई का इंतजार है। शिकायत में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और प्रशासनिक जांच के बाद ही पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
