Amarnath Yatra 2026: शुरू हुई अमरनाथ यात्रा: 57 दिनों तक चलेगी आस्था की डगर, पहलगाम और बालटाल रूट पर बने 100-100 बेड के हाईटेक अस्पताल

Amarnath Yatra 2026:

श्रीनगर/जम्मू। सुरक्षा के पुख्ता इंतजामों और ‘बम-बम भोले’ व ‘हर-हर महादेव’ के गगनभेदी जयकारों के बीच देश की सबसे पवित्र और प्रसिद्ध अमरनाथ यात्रा शुक्रवार से आधिकारिक रूप से शुरू हो गई है। आस्था और भक्ति का यह पावन सफर इस साल पूरे 57 दिनों तक चलेगा। यात्रा का पहला जत्था जम्मू-कश्मीर के गांदरबल जिले के बालटाल (Baltal) और अनंतनाग जिले के पहलगाम (Pahalgam) बेस कैंप से अलसुबह बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए मुख्य गुफा की ओर रवाना हो चुका है। पहले जत्थे में कुल 4,822 उत्साही श्रद्धालु शामिल हैं।

पहले दिन 9 हजार लोग करेंगे दर्शन, मौसम को लेकर प्रशासन सख्त प्रशासन से मिली जानकारी के मुताबिक, बाबा के दर्शन के लिए श्रद्धालु गुरुवार शाम को ही कश्मीर के दोनों मुख्य बेस कैंपों में पहुंच गए थे। जम्मू-कश्मीर प्रशासन का अनुमान है कि पहले जत्थे के इन श्रद्धालुओं के साथ सुरक्षा बल के जवान और व्यवस्था में लगे लोगों को मिलाकर कुल 9,000 लोग आज शाम तक पवित्र गुफा पहुंचकर बाबा बर्फानी के दर्शन कर लेंगे।

इस बीच यात्रा का दूसरा जत्था (3,865 श्रद्धालु) भी शुक्रवार देर शाम तक कश्मीर पहुंच जाएगा, जिन्हें शनिवार सुबह आगे रवाना किया जाएगा। कश्मीर में लगातार हो रही बारिश और बदलते मौसम को देखते हुए प्रशासन ने सभी यात्रियों को दर्शन करने के तुरंत बाद वापस नीचे लौटने की सख्त सलाह दी है।

ऑक्सीजन बूथ और डिजिटल स्क्रीन: इस बार किए गए हैं आधुनिक इंतजाम श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए इस बार अमरनाथ यात्रा मार्ग पर बेहद आधुनिक इंतजाम किए गए हैं:

  • ऑक्सीजन बूथ: दुर्गम पहाड़ियों और कम ऑक्सीजन वाले इलाकों को देखते हुए पूरे यात्रा मार्ग पर हर 2 किलोमीटर की दूरी पर विशेष ऑक्सीजन बूथ बनाए गए हैं।

  • डिजिटल स्क्रीन: डोमेल वाले रास्ते पर 4 अलग-अलग जगहों पर बड़ी डिजिटल स्क्रीन लगाई गई हैं, जो पल-पल के मौसम की सही जानकारी फ्लैश कर रही हैं।

  • वाटरप्रूफ डोम: बालटाल वाले रास्ते पर अचानक होने वाली बारिश से बचने के लिए 12 जगहों पर मजबूत वाटरप्रूफ डोम (सुरक्षित टेंट) बनाए गए हैं।

बता दें कि यह यात्रा दो रास्तों से होती है। पहला पारंपरिक रास्ता पहलगाम से है जो 48 किलोमीटर लंबा है और दूसरा छोटा रास्ता बालटाल से है जो 14 किलोमीटर लंबा है। यह यात्रा 28 अगस्त को समाप्त होगी।

स्वास्थ्य विभाग का ‘सुरक्षा कवच’: दोनों रूटों पर 100-100 बेड के अस्पताल पहाड़ों पर चढ़ते समय श्रद्धालुओं की सेहत से जुड़ी किसी भी परेशानी से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने दोनों रास्तों पर बेहद मजबूत तैयारी की है। दोनों ही मार्गों पर 1,000 से ज्यादा डॉक्टर और मेडिकल स्टाफ तैनात किए गए हैं। इसके साथ ही दोनों रूट पर 100-100 बेड के आधुनिक और अस्थायी अस्पताल तैयार किए गए हैं।

  • बालटाल मार्ग की स्वास्थ्य व्यवस्था: बालटाल रूट पर डोमेल गेट के पास ही मेडिकल एड सेंटर (प्राथमिक उपचार केंद्र) बनाया गया है। इसके आगे बढ़ने पर रेलपथरी, बरारी और संगम टॉप पर भी आपातकालीन चिकित्सा केंद्र और ऑक्सीजन की सुविधा मौजूद है।

  • पहलगाम मार्ग की स्वास्थ्य व्यवस्था: पारंपरिक पहलगाम मार्ग से जाने वाले यात्रियों के लिए नुनवान बेस कैंप पर ही एक बड़ा अस्पताल शुरू किया गया है। इसके आगे चंदनवाड़ी में 100 बिस्तरों का मुख्य बेस अस्पताल बनाया गया है, जहां चढ़ाई शुरू करने से पहले यात्री अपनी सेहत की जांच करवा सकते हैं। रास्ते में पिस्सू टॉप पर भी प्राथमिक उपचार केंद्र की सुविधा उपलब्ध है। इसके अलावा शेषनाग कैंप में रात को रुकने वाले यात्रियों के लिए भी वहां एक बड़ा बेस अस्पताल रात-दिन काम कर रहा है।

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