Gariyaband News गरियाबंद। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के राजा पड़ाव क्षेत्र में बिजली की मांग को लेकर ग्रामीणों ने एक ऐसा कदम उठाया है, जिसने हर किसी को भावुक और हैरान कर दिया है। वर्षों से विद्युत सुविधा (बिजली) से वंचित क्षेत्र के सैकड़ों ग्रामीणों ने अब अपनी पीड़ा सीधे देश के प्रधानमंत्री तक पहुंचाने का फैसला किया है। इसके लिए ग्रामीणों ने अपने ही खून से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) के नाम पत्र लिखकर गांवों में बिजली उपलब्ध कराने की मार्मिक अपील की है।
अड़गड़ी गौठान में जुटे 8 पंचायतों के 500 से अधिक ग्रामीण
राजा पड़ाव क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत कोकड़ी, गरहाडीह, गौरगांव, भूतबेड़ा, कुचेंगा समेत आठ पंचायतों के 48 गांवों और आश्रित पारा-टोलों के लगभग 500 ग्रामीण अड़गड़ी गौठान स्थल पर एकत्र हुए। ‘जय अंबेडकरवादी युवा संगठन’ और ‘किसान संघर्ष समिति राजा पड़ाव क्षेत्र’ के बैनर तले आयोजित इस कार्यक्रम में ग्रामीणों ने अपने खून से पोस्टकार्ड लिखे।
ग्रामीणों ने पत्र में उल्लेख किया है कि आधुनिक युग में भी वे अंधेरे में जीवन बिताने को मजबूर हैं। बिजली के अभाव में उनके बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं और आजीविका (रोजगार) बुरी तरह प्रभावित हो रही है, जो उनके लिए सबसे बड़ी परेशानी का कारण है।
अधिकारियों का तर्क: केंद्र की मंजूरी (NTCA NOC) के बिना बिजली संभव नहीं
कार्यक्रम का नेतृत्व कर रहे जिला पंचायत सदस्य संजय नेताम ने कहा कि 21वीं सदी में जहां सभी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं, वहीं इस क्षेत्र के लोगों का बिजली से वंचित रहना किसी अभिशाप से कम नहीं है। उन्होंने बताया कि पिछले एक दशक से ग्रामीण लगातार बिजली की मांग कर रहे हैं। हाल ही में आयोजित ‘सुशासन तिहार’ के समाधान शिविर में भी यह मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया था।
संजय नेताम के अनुसार, अधिकारियों ने ग्रामीणों को साफ कह दिया है कि यह क्षेत्र अभ्यारण्य (Forest Sanctuary) के दायरे में आता है। इस वजह से राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) की अनापत्ति (NOC) के बिना यहाँ विद्युतीकरण का काम संभव नहीं है। प्रशासन का कहना है कि इस पर अंतिम निर्णय केंद्र स्तर पर होना है, इसलिए राज्य सरकार अकेले बिजली उपलब्ध नहीं करा सकती। यही कारण है कि ग्रामीणों ने सीधे पीएम और एनटीसीए को पत्र भेजने का रास्ता चुना।
6 महीने में बिजली देने का वादा हुआ था फेल
ग्रामीणों ने प्रशासन पर वादाखिलाफ़ी का आरोप लगाते हुए कहा कि जनवरी 2026 में जिला प्रशासन ने उन्हें लिखित रूप से आश्वस्त किया था कि 6 महीने के भीतर क्षेत्र में बिजली का काम पूरा कर लिया जाएगा। हालांकि, निर्धारित समय-सीमा बीत जाने के बाद भी इस दिशा में कोई ठोस प्रगति या काम दिखाई नहीं दिया। इससे क्षेत्रवासियों में गहरी निराशा और नाराजगी फैल गई है।
सिंगल यूज़ सिरिंज से निकाला खून, उसी को बनाया स्याही
ग्रामीणों ने बताया कि इस कार्यक्रम की पूर्व सूचना उन्होंने प्रशासन को दे दी थी और सुरक्षित तरीके से खून निकालने के लिए मेडिकल सहायता की मांग भी की थी, लेकिन प्रशासन से कोई सहयोग नहीं मिला। इसके बावजूद, ग्रामीणों ने सुरक्षा मानकों का पूरा ध्यान रखा। हर एक व्यक्ति के लिए अलग-अलग सिंगल यूज़ सिरिंज (Single Use Syringe) का इस्तेमाल कर खून निकाला गया। इसी खून को स्याही की तरह उपयोग करके ग्रामीणों ने पोस्टकार्ड पर अपनी भावनाएं और समस्याएं लिखीं।
विरोध नहीं, बल्कि मांग का संवेदनशील तरीका
क्षेत्र के सरपंच चिमन नेताम, रामदेव मरकाम, साधुराम नेताम और पतंग मरकाम ने स्पष्ट किया कि यह किसी प्रकार का उग्र विरोध प्रदर्शन नहीं है, बल्कि अपनी मांग को बेहद संवेदनशील तरीके से सरकार के सामने रखने का प्रयास है। उनका कहना है कि वर्ष 2006 से अब तक वे सामान्य स्याही से हजारों पत्र लिख चुके हैं, कई धरना-प्रदर्शन और ज्ञापन भी दिए, लेकिन सब बेअसर रहे। इसलिए इस बार उन्होंने अपनी पीड़ा को खून से लिखकर सीधे प्रधानमंत्री तक पहुंचाने का निर्णय लिया।
स्पीड पोस्ट से भेजे जाएंगे 500 से अधिक पत्र
ग्रामीणों ने बताया कि अड़गड़ी गौठान में लिखे गए इन 500 से अधिक पत्रों को प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) और राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) को स्पीड पोस्ट के माध्यम से भेजा जा रहा है। क्षेत्रवासियों को पूरी उम्मीद है कि उनकी यह भावनात्मक और अनोखी अपील केंद्र सरकार और संबंधित एजेंसियों का ध्यान जरूर आकर्षित करेगी और उनकी वर्षों पुरानी बिजली की समस्या का स्थायी समाधान निकलेगा।
एक तरफ करोड़ों का खर्च, दूसरी तरफ लालटेन युग!
संस्कारधानी का हाल! जहां एक तरफ अमृत मिशन जैसी योजनाओं के नाम पर ₹230 करोड़ रुपये पानी की तरह बहा दिए गए, वहीं दूसरी तरफ राजा पड़ाव क्षेत्र के ग्रामीण बुनियादी सुविधाओं के लिए आज भी तरस रहे हैं और सिस्टम की खामियों के कारण हर रोज डीजल और मिट्टी तेल में हजारों रुपये फूंकने को मजबूर हैं।
