नई दिल्ली/रायपुर। छत्तीसगढ़ क्रांति सेना के प्रदेश अध्यक्ष अमित बघेल को देश की सर्वोच्च अदालत से बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने बलौदाबाजार हिंसा मामले में अमित बघेल और उनके दो सहयोगियों को नियमित जमानत (Regular Bail) दे दी है। इस फैसले के बाद अमित बघेल के जेल से बाहर आने का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने अमित बघेल के साथ-साथ इस मामले के दो अन्य सह-आरोपियों—अजय यादव और दिनेश वर्मा की जमानत याचिका को भी मंजूर कर लिया है।
हाईकोर्ट का फैसला निरस्त, सुप्रीम कोर्ट ने दिया यह तर्क
जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान अमित बघेल की ओर से देश के वरिष्ठ अधिवक्ता पी. बी. सुरेश और हर्षवर्धन परगनिहा ने पैरवी की।
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सरकार का विरोध: छत्तीसगढ़ राज्य सरकार की ओर से अमित बघेल की जमानत का कड़ा विरोध किया गया। सरकारी वकील का तर्क था कि आरोपियों की हिरासत की अवधि अभी बहुत कम है और मामला बेहद गंभीर है।
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सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी: सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार के इस तर्क को जमानत खारिज करने का पर्याप्त आधार नहीं माना। अदालत ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के पूर्व आदेश को निरस्त करते हुए कहा कि चूंकि इस मामले में जांच पूरी हो चुकी है और चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है, इसलिए आरोपियों को अनिश्चितकाल तक जेल की सलाखों के पीछे रखना न्यायोचित नहीं है।
ध्यातव्य है कि अमित बघेल को रायपुर में दर्ज एक अन्य मामले (कथित आपत्तिजनक टिप्पणी) में पहले ही कोर्ट से जमानत मिल चुकी है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट के इस ताजा आदेश के बाद अब उनकी रिहाई का मार्ग प्रशस्त हो गया है।
क्या है बलौदाबाजार हिंसा का पूरा मामला?
यह पूरा विवाद 10 जून 2024 को बलौदाबाजार में भड़की अभूतपूर्व हिंसा से जुड़ा हुआ है:
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उग्र प्रदर्शन और आगजनी: बलौदाबाजार के दशहरा मैदान में आयोजित एक सामाजिक विरोध प्रदर्शन के दौरान भीड़ अचानक उग्र हो गई थी। आरोप है कि कुछ नेताओं द्वारा दिए गए भड़काऊ भाषणों के बाद कलेक्टोरेट और पुलिस अधीक्षक (SP) कार्यालय पर धावा बोल दिया गया।
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करोड़ों का नुकसान: उग्र भीड़ ने संयुक्त जिला कार्यालय (कलेक्टोरेट) भवन में आग लगा दी थी, जिससे महत्वपूर्ण सरकारी दस्तावेज जलकर खाक हो गए थे। इसके अलावा परिसर में खड़ी सैकड़ों कारों और दोपहिया वाहनों को भी फूंक दिया गया था।
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जवानों पर हमला: उपद्रव को शांत कराने की कोशिश कर रहे ड्यूटी पर तैनात कई पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों पर भी जानलेवा हमला किया गया था। इस भारी बवाल के बाद पुलिस ने अमित बघेल समेत क्रांति सेना के कई पदाधिकारियों को हिंसा भड़काने का मुख्य आरोपी बनाते हुए गिरफ्तार किया था।
