नई दिल्ली/प्रयागराज: एक दौर था जब उत्तर प्रदेश की संगम नगरी प्रयागराज (तत्कालीन इलाहाबाद) की पहचान उसके कवियों, साहित्यकारों, जजों और अमिताभ बच्चन व जवाहरलाल नेहरू जैसे दिग्गजों से होती थी। लेकिन बीते चार दशकों में इस शांत शहर के सीने पर अपराध और राजनीति के गठजोड़ का एक ऐसा काला साया छाया, जिसका नाम था—अतीक अहमद।
मार्च 2023 में पहली बार अपहरण के एक मामले में उम्रकैद की सजा पाने वाले और 15 अप्रैल 2023 की रात पुलिस हिरासत में लाइव टीवी पर गोलियों से भून दिए गए अतीक अहमद की जिंदगी किसी फिल्मी पटकथा से कम खौफनाक नहीं थी।
1. तांगेवाले का बेटा और अपराध की दुनिया में पहला कदम
1962 में इलाहाबाद के मुस्लिम बहुल इलाके में जन्मे अतीक अहमद के पिता तांगा (घोड़ा-गाड़ी) चलाते थे। हाई स्कूल की पढ़ाई बीच में ही छोड़ने वाले अतीक ने बहुत कम उम्र में ही छोटी-मोटी चोरियों से जरायम की दुनिया में कदम रखा।
-
1979 में पहला मर्डर केस: महज 17 साल की उम्र में अतीक पर हत्या का पहला केस दर्ज हुआ, हालांकि सबूतों के अभाव में आरोप सिद्ध नहीं हो सके।
-
रंगदारी और जमीन पर कब्जा: 80 के दशक में उसने रेलवे यार्ड से स्क्रैप चुराना, सरकारी ठेकों के लिए ठेकेदारों को धमकाना और जमीनों पर अवैध कब्जे करना शुरू कर दिया।
2. गुरु ‘चांद बाबा’ की हत्या और राजनीति में एंट्री (1989)
अतीक अहमद ने अपने शुरुआती दिनों में तत्कालीन दबंग नेता और नगर पार्षद शौक इलाही उर्फ ‘चांद बाबा’ के गैंग को जॉइन किया। लेकिन जल्द ही अतीक की महत्वाकांक्षाएं बढ़ गईं।
-
1989 का विधानसभा चुनाव: अतीक ने इलाहाबाद पश्चिम सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला किया। चांद बाबा ने उसे हटने को कहा, लेकिन अतीक नहीं माना।
-
सड़कों पर गैंगवार: चुनाव नतीजों के दौरान दोनों गुटों के बीच दिन-दहाड़े शहर की सड़कों पर खूनी गैंगवार हुई, जिसमें चांद बाबा मारा गया। अतीक चुनाव जीत गया और पहली बार विधायक बनकर सीधे लाइमलाइट में आ गया।
3. ‘इंटर-स्टेट गैंग 227’ और 5 बार विधायक, 1 बार सांसद
चांद बाबा के खात्मे के बाद अतीक अहमद इलाहाबाद का सबसे बड़ा और खौफनाक माफिया बन गया। उसने अपना गिरोह बनाया जिसका नाम पुलिस फाइलों में “इंटर-स्टेट गैंग 227” दर्ज हुआ।
-
राजनीतिक सफर: अतीक इलाहाबाद पश्चिम सीट से लगातार 5 बार विधायक चुना गया। इसके बाद 2004 में उसने मुलायम सिंह यादव की समाजवादी पार्टी के टिकट पर फूलपुर लोकसभा सीट (जहाँ से कभी देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू सांसद चुने जाते थे) से सांसदी का चुनाव जीता।
-
100 से अधिक आपराधिक केस: अतीक पर हत्या, अपहरण, रंगदारी और जमीनों पर कब्जे के 100 से ज्यादा मुकदमे दर्ज थे।
-
जज भी डरते थे: अतीक के खौफ का आलम यह था कि 2012 में इलाहाबाद हाईकोर्ट के 10 जजों ने उसकी जमानत याचिका पर सुनवाई से खुद को अलग (Recuse) कर लिया था।
4. विधायक राजू पाल हत्याकांड (2005): बर्बरता की सारी हदें पार
2004 में अतीक के सांसद बनने के बाद इलाहाबाद पश्चिम की खाली हुई विधानसभा सीट पर उपचुनाव हुआ। अतीक ने यह सीट अपने भाई अशरफ को दिलाने की कोशिश की, लेकिन बसपा (BSPA) के युवा नेता राजू पाल ने अशरफ को 4,000 वोटों से हरा दिया। अतीक इस हार को पचा नहीं पाया।
-
दिन-दहाड़े गोलियों की बौछार: शादी के महज 9 दिन बाद, जनवरी 2005 की एक कोहरे वाली सुबह राजू पाल की एसयूवी (SUV) को अतीक के शार्पशूटरों ने घेर लिया और अंधाधुंध फायरिंग कर दी।
-
अस्पताल ले जाते वक्त भी हमला: गंभीर रूप से घायल राजू पाल को जब अस्पताल ले जाया जा रहा था, तब अतीक के गुर्गों ने गाड़ियों का पीछा किया और सड़क पर गोलियां बरसाते रहे। अस्पताल के बाहर राजू पाल के शरीर में दो और गोलियां दागी गईं ताकि उनके बचने की कोई गुंजाइश न रहे। डॉक्टरों को उनके शरीर से 19 गोलियां मिली थीं।
5. जेल से भी चलता था ‘अतीक का दरबार’
जेल जाने के बावजूद अतीक का साम्राज्य कमजोर नहीं पड़ा।
-
जेल में बिजनेसमैन की पिटाई: 2018 में लखनऊ के कारोबारी मोहित जायसवाल का अपहरण कर देवरिया जेल ले जाया गया, जहाँ अतीक, उसके बेटे और जेल कर्मचारियों ने मिलकर बिजनेसमैन को बेरहमी से पीटा और उसकी कंपनियों के शेयर अपने नाम ट्रांसफर करवा लिए।
-
संसद में 2008 का वो वोट: 2008 में भारत-अमेरिका परमाणु डील पर UPA सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव के दौरान, अतीक अहमद को जेल से पैरोल पर रिहा करके दिल्ली संसद भेजा गया था ताकि वह वोट डाल सके।
6. अंत: लाइव टीवी पर 15 अप्रैल 2023 को सनसनीखेज अंत
मार्च 2023 में राजू पाल हत्याकांड के मुख्य गवाह उमेश पाल के अपहरण केस में अतीक को पहली बार उम्रकैद की सजा हुई। इसके कुछ ही दिनों बाद, 15 अप्रैल 2023 की रात करीब 10:30 बजे, जब पुलिस अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ को मेडिकल जांच के लिए प्रयागराज के अस्पताल ले जा रही थी, तब मीडियाकर्मी बनकर आए तीन हमलावरों ने पुलिस और कैमरों के सामने पॉइंट-ब्लैंक रेंज से गोलियां मारकर दोनों भाइयों का काम तमाम कर दिया।
