नई दिल्ली: राजधानी नई दिल्ली में आयोजित तीन दिवसीय 18वें ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन का रविवार, 13 सितंबर 2026 को सफलतापूर्वक समापन हो गया। सम्मेलन के समापन सत्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिक्स को वैश्विक चुनौतियों के लिए ‘समाधान का इकोसिस्टम’ करार दिया, जिससे आज पूरी दुनिया को बड़ी उम्मीदें हैं।
सम्मेलन के दौरान कूटनीतिक सक्रियता दिखाते हुए पीएम मोदी ने पिछले 3 दिनों में दुनिया भर के राष्ट्रप्रमुखों और सरकार के प्रमुखों के साथ 15 द्विपक्षीय बैठकें (Bilateral Meetings) कीं। इसके अलावा उन्होंने संयुक्त राष्ट्र (UN) और वर्ल्ड बैंक जैसे कई प्रमुख अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रमुखों से भी मुलाकात की।
प्रमुख द्विपक्षीय वार्ताएं: कूटनीतिक रणनीतियां
1. भारत-चीन वार्ता: संबंधों में स्थिरता और व्यापार असंतुलन पर जोर
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ पीएम मोदी की बैठक में द्विपक्षीय संबंधों को पटरी पर लाने, सीमा विवादों के समाधान और व्यापारिक रिश्तों पर विस्तृत चर्चा हुई।
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दोनों नेताओं ने इस बात पर सहमति जताई कि आपसी मतभेदों को विवादों में नहीं बदलना चाहिए और संबंधों को एक रणनीतिक दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए।
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बैठक में भारत और चीन के बीच बढ़ते व्यापार असंतुलन, ग्लोबल सप्लाई चेन की बाधाओं और दोनों देशों के बाजारों तक पारदर्शी व भरोसेमंद पहुंच सुनिश्चित करने पर विशेष बल दिया गया।
2. भारत-रूस रणनीतिक साझेदारी: रक्षा, ऊर्जा और वैश्विक मुद्दे
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ हुई उच्चस्तरीय बैठक में भारत और रूस के बीच रणनीतिक साझेदारी को नया आयाम देने पर बात हुई।
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दोनों देशों ने रक्षा, द्विपक्षीय व्यापार, ऊर्जा, अंतरिक्ष और औद्योगिक सहयोग को मजबूत करने की दिशा में कदम उठाने पर सहमति जताई।
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नेताओं ने पश्चिम एशिया (West Asia) के मौजूदा संकट और समुद्री व्यापार सुरक्षा जैसे संवेदनशील मुद्दों पर भी गहन विचार-विमर्श किया।
नई दिल्ली घोषणापत्र: रूस-यूक्रेन मुद्दे पर ब्रिक्स का रुख
18वें ब्रिक्स सम्मेलन में सर्वसम्मति से पारित ‘नई दिल्ली घोषणापत्र’ में दुनिया भर के 15 अलग-अलग संघर्षों और युद्धों (जैसे फ़िलिस्तीन, सूडान, सीरिया) का स्पष्ट उल्लेख किया गया है।
हालांकि, इस घोषणापत्र में रूस-यूक्रेन युद्ध का कोई सीधा जिक्र नहीं है। कूटनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, यह कदम ब्रिक्स समूह के भीतर सभी सदस्य देशों के बीच सर्वसम्मति बनाए रखने और रूस के साथ भारत के संतुलित व मजबूत रणनीतिक संबंधों को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है।
