रायपुर: BRICS शिखर सम्मेलन 2026 के नई दिल्ली घोषणापत्र में 22 अप्रैल 2025 को हुए पहलगाम आतंकी हमले की कड़ी निंदा किए जाने के बाद देश में सियासत तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) जहाँ इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बड़ी कूटनीतिक जीत के रूप में पेश कर रही है, वहीं कांग्रेस ने इस पर कड़ा ऐतराज जताया है। छत्तीसगढ़ कांग्रेस के वरिष्ठ नेता विकास उपाध्याय ने केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए सवाल उठाया है कि सिर्फ बयानों और घोषणापत्रों से आतंकवाद खत्म नहीं होगा, सरकार को ठोस कार्रवाई का हिसाब देना चाहिए।
बयानबाज़ी नहीं, ठोस कार्रवाई की ज़रूरत: विकास उपाध्याय
कांग्रेस नेता विकास उपाध्याय ने कहा कि भाजपा सरकार BRICS घोषणापत्र में आतंकवाद की निंदा शामिल होने का श्रेय लेने में जुटी है, लेकिन देश को केवल बयानों की नहीं, बल्कि आतंकवाद से स्थायी मुक्ति के लिए ठोस कदमों की सख्त जरूरत है। उन्होंने सरकार से सीधे सवाल पूछते हुए कहा:
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अगर BRICS समिट में आतंकवाद की निंदा हुई है, तो सरकार बताए कि इस मंच से आतंकवाद को जड़ से खत्म करने के लिए कौन से ठोस और व्यावहारिक कदम तय किए गए?
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पहलगाम हमले के दोषियों और मास्टरमाइंड को कब तक सजा मिलेगी?
उपाध्याय ने जोर देकर कहा कि देश के लिए असली कूटनीतिक सफलता तब मानी जाएगी, जब सीमा पार से होने वाली आतंकवादी गतिविधियों और फंडिंग पर प्रभावी रोक लगाने के लिए धरातल पर मजबूत रणनीति तैयार हो, न कि केवल अंतरराष्ट्रीय बैठकों के कागजी प्रस्तावों तक सीमित रहे।
BRICS नई दिल्ली घोषणापत्र में क्या है?
गौरतलब है कि भारत की अध्यक्षता में नई दिल्ली में आयोजित 18वें BRICS शिखर सम्मेलन (12-13 सितंबर 2026) में सभी सदस्य देशों ने सर्वसम्मति से ‘नई दिल्ली घोषणापत्र’ को मंजूरी दी है। इस घोषणापत्र में पिछले साल हुए 22 अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले की स्पष्ट रूप से निंदा की गई है। साथ ही, आतंकवाद के प्रति ‘जीरो टॉलरेंस’ (Zero Tolerance) की नीति अपनाने और आतंकवादियों समेत उनके मददगारों व पनाहगाहों को जवाबदेह ठहराने का सामूहिक संकल्प दोहराया गया है।
BRICS 2026 क्यों है भारत के लिए खास?
BRICS (ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका) के हालिया विस्तार के बाद इसमें मिस्र, इथियोपिया, ईरान, इंडोनेशिया और यूएई जैसे प्रमुख देश भी शामिल हो चुके हैं। 2026 में भारत इस प्रभावशाली वैश्विक समूह की अध्यक्षता कर रहा है। नई दिल्ली में संपन्न हुए इस 18वें शिखर सम्मेलन में आतंकवाद के मुद्दे के अलावा वैश्विक शासन सुधार (Global Governance Reform), व्यापार, टैरिफ नीति और पश्चिम एशिया के मौजूदा तनाव जैसे संवेदनशील अंतरराष्ट्रीय विषयों पर भी विस्तृत चर्चा हुई है।
