मुंगेली/रायपुर: छत्तीसगढ़ के लोक निर्माण विभाग (PWD) में गुणवत्ता नियंत्रण और विभागीय साख को कटघरे में खड़ा करने वाला एक गंभीर मामला सामने आया है। सूबे के उपमुख्यमंत्री और पीडब्ल्यूडी मंत्री अरुण साव के गृह जिले मुंगेली में एक निर्माणाधीन सड़क एवं पहुंच मार्ग परियोजना का स्लैब ताश के पत्तों की तरह ढह गया। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने विभागीय अफसरों से लेकर ठेकेदार तक की नींद उड़ा दी है।
क्या है पूरा मामला और कौन है ठेकेदार?
मिली जानकारी के अनुसार, लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) संभाग बिलासपुर के अंतर्गत मुंगेली के प्रसिद्ध मोतिपुर (अमरटापू) मंदिर के दोनों तरफ पहुंच मार्ग का निर्माण कार्य कराया जा रहा है।
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परियोजना की लंबाई: लगभग 1.10 किलोमीटर।
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अनुबंध व तारीख: अनुबंध क्रमांक 32/2024-25 के तहत इस कार्य का आदेश 12 नवंबर 2024 को जारी किया गया था।
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निर्माण एजेंसी: इस वीआईपी प्रोजेक्ट का ठेका मुंगेली की ‘कांति कंस्ट्रक्शन’ के पास है।
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जिम्मेदार अफसर: इस पूरे निर्माण कार्य की मॉनिटरिंग कार्यपालन अभियंता (EE) एस.के. सतपति, अनुविभागीय अधिकारी (SDO) एम.के. जैन और उप अभियंता (Sub Engineer) गौतम कुमार की देखरेख में की जा रही है।
वायरल वीडियो ने खोली पोल: रातों-रात सबूत मिटाने की कोशिश?
सोशल मीडिया पर जो वीडियो वायरल हो रहा है, उसमें साफ देखा जा सकता है कि निर्माणाधीन स्लैब का एक बड़ा हिस्सा अचानक ढह गया। स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि यह घटना करीब दो दिन पुरानी है। आरोप यह भी लग रहे हैं कि घटना के तुरंत बाद मामले को दबाने के लिए रातों-रात वहां से मलबे को साफ कर स्थिति को सामान्य दिखाने का प्रयास किया गया।
जनता के मन में उठ रहे ये बड़े सवाल:
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अगर निर्माण कार्य में निर्धारित तकनीकी और गुणवत्ता मानकों का पालन किया जा रहा था, तो ढलाई के दौरान ही स्लैब क्यों गिर गया?
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क्या कांति कंस्ट्रक्शन द्वारा घटिया निर्माण सामग्री का इस्तेमाल किया जा रहा था?
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इतने बड़े वीआईपी जिले के प्रोजेक्ट में हुई इस घटना को सार्वजनिक रूप से छिपाने की कोशिश क्यों की गई?
पीडब्ल्यूडी विभाग का दावा – कोई जनहानि नहीं, ठेकेदार को नोटिस
इस पूरे मामले में जब विवाद बढ़ा तो कार्यपालन अभियंता (EE) एस.के. सतपति ने सामने आकर सफाई दी। उन्होंने कहा, “स्लैब गिरने की इस घटना में किसी प्रकार की जनहानि या किसी मजदूर को चोट नहीं आई है। विभाग ने तकनीकी गड़बड़ी को देखते हुए संबंधित ठेकेदार (कांति कंस्ट्रक्शन) को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया है और क्षतिग्रस्त हिस्से को नए सिरे से ठीक करने के निर्देश दिए गए हैं।”
हालांकि, विभागीय अफसरों का यह रटा-रटाया जवाब स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के गले नहीं उतर रहा है। सवाल यह है कि क्या डिप्टी सीएम के जिले में इतनी बड़ी तकनीकी लापरवाही पर सिर्फ एक ‘नोटिस’ जारी कर देना काफी है?
भ्रष्टाचार की बू या सिर्फ तकनीकी खामी?
स्थानीय ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सीधे तौर पर इसमें बड़े भ्रष्टाचार की आशंका जताई है। लोगों का कहना है कि जो ढांचा उद्घाटन से पहले ही भरभराकर गिर जाए, वह भविष्य में आम जनता और वाहनों का दबाव कैसे झेलेगा? यह सीधे तौर पर जनता के पैसों की बर्बादी और विभागीय साख से खिलवाड़ है।
मंत्री के गृह जिले में साख दांव पर, उच्च स्तरीय जांच की मांग
चूंकि मुंगेली जिला प्रदेश के उपमुख्यमंत्री और लोक निर्माण विभाग के कद्दावर मंत्री अरुण साव का गृह क्षेत्र है, इसलिए इस मामले ने अब सियासी तूल भी पकड़ लिया है। विपक्षी दलों से लेकर आम जनता की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या इस मामले की कोई स्वतंत्र और उच्च स्तरीय तकनीकी जांच (High-Level Technical Inquiry) कराई जाएगी? क्या लापरवाह इंजीनियरों और कांति कंस्ट्रक्शन के खिलाफ ब्लैकलिस्ट करने जैसी कड़ी कार्रवाई होगी या फिर मामला सिर्फ लीपापोती और मरम्मत तक ही सीमित रह जाएगा?
