शामली। जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद रविवार को उत्तर प्रदेश के शामली पहुंचे। इस दौरान उन्होंने अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा गबन मामले को लेकर खुलकर अपनी प्रतिक्रिया दी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के एक फैसले की सराहना की।
शंकराचार्य ने कहा कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा मुलाकात नहीं किए जाने का निर्णय उचित है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों पर आरोप लगे हों, उनसे दूरी बनाए रखना सार्वजनिक जीवन में एक सही और जिम्मेदार कदम माना जाना चाहिए।
राम मंदिर ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए शंकराचार्य ने कहा कि ट्रस्ट का सीधा संबंध प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) से है और ऊपर से प्राप्त निर्देशों के अनुसार ही रिपोर्ट शासन तक पहुंचती है।
ट्रस्ट में कथित अनियमितताओं के संबंध में सबूत नहीं मिलने के सवाल पर उन्होंने कहा कि कई घटनाएं स्वयं गंभीर संकेत देती हैं। उन्होंने सीसीटीवी से कथित छेड़छाड़ और अन्य विवादित मामलों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन पहलुओं की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उनका कहना था कि जो लोग सवाल उठाते हैं, उन्हें व्यवस्था से बाहर कर दिया जाता है, जिससे कई तरह की शंकाएं पैदा होती हैं।
शंकराचार्य ने मांग की कि पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए। उन्होंने कहा कि यदि किसी भी स्तर पर अनियमितता या गड़बड़ी सामने आती है तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
इस दौरान उन्होंने राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा पर भी निशाना साधा। शंकराचार्य ने आरोप लगाया कि पूर्व में गौ सेवकों पर हुई गोलीबारी की घटनाओं से उनका नाम जोड़ा जाता रहा है और आज वही व्यक्ति राम मंदिर निर्माण से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों की मौजूदगी उन्हें पीड़ा पहुंचाती है।
शंकराचार्य के इन बयानों के बाद राम मंदिर ट्रस्ट और उससे जुड़े विवाद एक बार फिर चर्चा में आ गए हैं। हालांकि, समाचार लिखे जाने तक ट्रस्ट की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।
