रायपुर। छत्तीसगढ़ में इस साल अल-नीनो के प्रभाव के चलते मानसून की शुरुआत बेहद निराशाजनक रही है। राज्य में सूखे की आशंका गहरा गई है, जिसने सरकार और प्रदेश के लाखों किसानों की चिंता बढ़ा दी है। इस संकट से निपटने के लिए राज्य सरकार ने युद्ध स्तर पर एक व्यापक आकस्मिक कार्ययोजना (Contingency Plan) तैयार की है।
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में आयोजित एक अहम वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग बैठक में छत्तीसगढ़ के कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने राज्य की मुस्तैदी और तैयारियों की विस्तृत जानकारी साझा की। इस बैठक में कृषि उत्पादन आयुक्त सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी समेत कई वरिष्ठ अधिकारी और वैज्ञानिक शामिल हुए।
आंकड़े दे रहे हैं गवाही: 10 साल में सबसे कम बारिश
कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने बैठक में चौंकाने वाले आंकड़े सामने रखे:
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मानसून की भारी कमी: 22 जून 2026 तक राज्य में औसत वर्षा महज 30.8 मिलीमीटर दर्ज की गई है, जो पिछले 10 वर्षों के औसत से 58.3 मिलीमीटर कम है।
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बोनी की धीमी रफ्तार: इस साल प्रदेश में 48.69 लाख हेक्टेयर में खरीफ बोनी का लक्ष्य रखा गया है, लेकिन सूखे के हालात के चलते अब तक सिर्फ 2 प्रतिशत क्षेत्र में ही बोनी हो पाई है।
सरकार का ‘प्लान-B’: धान के बदले अब दलहन-तिलहन पर जोर
यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो खरीफ का पूरा सीजन बर्बाद हो सकता है। किसानों के आर्थिक नुकसान को कम करने के लिए सरकार ने यह रणनीति बनाई है:
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वैकल्पिक फसलें: कृषि विभाग अब कम अवधि (Short Duration) में तैयार होने वाली धान की किस्मों के साथ-साथ मक्का, कोदो, कुटकी, रागी, दलहन और तिलहन के बीजों के वितरण पर जोर दे रहा है।
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अंतरवर्तीय फसल प्रणाली (Inter-cropping): ऊंचे ढलान वाली (उच्चहन) जमीनों पर किसानों को मिक्स क्रॉपिंग अपनाने की सलाह दी जा रही है।
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फसल बीमा पर विशेष फोकस: फसल नुकसान की भरपाई के लिए बीमा कंपनियों के साथ तालमेल बिठाकर विशेष और प्रभावी बीमा प्लान एक्टिव किया जा रहा है।
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वैज्ञानिकों की मदद: इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (IGKV), रायपुर के अनुसंधान विभाग ने अल-नीनो को ध्यान में रखकर स्पेशल गाइडलाइन जारी की है।
संकटग्रस्त 15 जिलों के लिए बीज सुरक्षा प्लान
सूखे की मार झेल रहे क्षेत्रों के लिए राज्य बीज निगम ने कमर कस ली है:
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इस सीजन में कुल 4.95 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज वितरण का लक्ष्य है।
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सबसे ज्यादा प्रभावित 15 संकटग्रस्त जिलों के लिए 1,22,095 क्विंटल बीज की व्यवस्था की गई है, जिसमें से 48,449 क्विंटल बीज किसानों को बांटे भी जा चुके हैं।
आगे क्या?
आने वाले दिनों में सहकारी सोसायटियों के माध्यम से कम पानी वाले बीजों और नैनो उर्वरकों का वितरण तेज किया जाएगा। कृषि विभाग के मैदानी अधिकारी लगातार गांवों का दौरा कर किसानों को जागरूक करेंगे। यदि मानसून की बेरुखी आगे भी जारी रहती है, तो सरकार प्रभावित क्षेत्रों के लिए विशेष राहत पैकेज और सिंचाई के वैकल्पिक संसाधनों (जैसे ट्यूबवेल/पंप) के लिए बड़ी घोषणा कर सकती है।
