रायपुर। छत्तीसगढ़ के 65 लाख बिजली उपभोक्ताओं के लिए एक बेहद बुरी खबर है। जुलाई महीने में आने वाला आपका जून का बिजली बिल बजट बिगाड़ने की तैयारी में है। छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत वितरण कंपनी ने फ्यूल एंड पावर परचेज एग्रीमेंट सरचार्ज यानी FPPAS शुल्क में 2 फीसदी की बड़ी बढ़ोतरी कर दी है। इस फैसले के बाद अब उपभोक्ताओं को 9.13 फीसदी के बजाय 11.23 फीसदी की दर से यह चार्ज देना होगा। कंपनियों के इस फैसले का सीधा असर आम जनता की जेब पर पड़ने वाला है।
अगस्त में लगेगा महंगाई का ‘डबल झटका’ राहत की उम्मीद कर रहे उपभोक्ताओं की परेशानी सिर्फ जुलाई तक सीमित नहीं रहने वाली है। अगस्त का महीना और भी ज्यादा जेब खाली करने वाला साबित होगा। अगस्त में जब जुलाई महीने का बिल जारी होगा, तब ग्राहकों को बढ़ा हुआ FPPAS शुल्क तो देना ही होगा, साथ ही राज्य में नया और महंगा बिजली टैरिफ (Tariff Rates) भी लागू कर दिया जाएगा। यानी अगस्त के महीने से प्रदेश में बिजली की मूल दरें भी महंगी हो जाएंगी, जिससे उपभोक्ताओं पर दोहरी मार पड़ेगी।
क्यों महंगी हुई प्रदेश में बिजली? पावर कंपनी के जानकारों और अधिकारियों के मुताबिक, इस बार भीषण गर्मी के चलते राज्य में बिजली की मांग रिकॉर्ड 7 हजार मेगावाट तक पहुंच गई थी। इस भारी डिमांड को पूरा करने के लिए कंपनी को दूसरे राज्यों से महंगे दामों पर बिजली खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ा। इसके अलावा, कोरबा स्थित 210 मेगावाट के दो पावर प्लांट बीते दो महीनों से तकनीकी दिक्कतों के कारण बंद पड़े थे। इनमें से एक प्लांट अभी भी बंद है, जिससे घरेलू बिजली उत्पादन में भारी कमी आई है। इसी बाहरी खर्च और कम उत्पादन का खामियाजा अब उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ रहा है।
सालभर बदलता रहा है गणित आपको बता दें कि FPPAS शुल्क कोई स्थायी चार्ज नहीं है, बल्कि यह हर महीने बिजली कंपनियों की ईंधन खरीदी लागत के आधार पर बदलता रहता है। अगर पिछले आंकड़ों पर नजर डालें तो पिछले साल दिसंबर के बिल में यह चार्ज 13.64 फीसदी तक पहुंच गया था, जिसने रिकॉर्ड तोड़ दिया था। इसके बाद मार्च में यह घटकर 5.91%, अप्रैल में 4.24% और मई में 3.98 फीसदी के न्यूनतम स्तर पर आ गया था। लेकिन जून के बिल में इसे बढ़ाकर 9.13% किया गया और अब जुलाई के बिल में यह सीधे 11.23 फीसदी पहुंच चुका है, जिसने उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ा दी है।
