रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर का कलेक्ट्रेट परिसर शुक्रवार को भारी हंगामे और नारेबाजी से गूंज उठा। नकटी गांव में प्रशासन द्वारा की गई बुलडोजर कार्रवाई के विरोध में बेघर हुए पीड़ित परिवार अब इंसाफ की गुहार लेकर कलेक्ट्रेट के सामने अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए हैं। धरने में बड़ी संख्या में महिलाएं, बुजुर्ग और मासूम बच्चे शामिल हैं, जो अपने उजड़े आशियाने की तस्वीरें हाथों में लिए रोते-बिलखते नजर आए।
इस मामले में छत्तीसगढ़ की सियासत भी पूरी तरह गरमा गई है। कांग्रेस नेताओं के आंदोलन में कूदने और पक्ष-विपक्ष के दिग्गजों के बयानों के बाद प्रशासन बैकफुट पर नजर आ रहा है।
प्रदर्शन कर रहे नकटी गांव के विस्थापितों ने जिला प्रशासन और स्थानीय विधायक अनुज शर्मा के खिलाफ जमकर आक्रोश जताया। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन द्वारा उन्हें ईडब्ल्यूएस (EWS) मकान देने का जो दावा किया जा रहा है, वह पूरी तरह खोखला है।
ग्रामीणों ने मीडिया से चर्चा में कहा:
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अधूरा आवंटन: गांव के सभी विस्थापित परिवारों को रहने के लिए मकान नहीं मिले हैं।
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जगह की कमी: जो मकान दिए भी गए हैं, वे इतने छोटे हैं कि बड़े परिवारों का उनमें रहना नामुमकिन है।
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बुनियादी संकट: आवंटित की गई जगहों पर पीने का पानी, बिजली और ड्रेनेज जैसी मूलभूत सुविधाओं का कोई अता-पता नहीं है।
ग्रामीणों की अब सिर्फ एक ही मांग है कि उन्हें नकटी गांव में ही सम्मानजनक ढंग से घर बनाकर दिए जाएं।
“हम अपराधी नहीं, हक मांगने आए हैं” आंदोलन की गंभीरता को देखते हुए कलेक्ट्रेट परिसर को छावनी में तब्दील कर दिया गया है। परिसर में आनन-फानन में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाने पर ग्रामीणों ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “हमें इस तरह निगरानी में रखा जा रहा है जैसे हमने कोई बड़ा जुर्म किया हो। हम अपराधी नहीं, अपने आशियाने का हक मांगने आए हैं।”
सिंहदेव और बृजमोहन अग्रवाल ने उठाए सवाल
नकटी गांव के इस मुद्दे पर सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों ही प्रशासनिक कार्रवाई के खिलाफ खड़े नजर आ रहे हैं। गुरुवार को पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव ने पीड़ितों के बीच पहुंचकर उनका दर्द साझा किया था। वहीं, रायपुर के सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने भी इस कार्रवाई पर कड़ा ऐतराज जताते हुए कहा कि “रात के अंधेरे में लोगों के घर तोड़ने वाले अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, मैं आज भी ग्रामीणों के साथ खड़ा हूं।”
जब तक प्रशासन की ओर से विस्थापितों को नकटी गांव में ही बसाने का ठोस और लिखित आश्वासन नहीं मिलता, तब तक ग्रामीणों ने धरना खत्म न करने का एलान किया है।
