रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के चर्चित और हाईप्रोफाइल नव्या मलिक एमडीएमए (MDMA) ड्रग्स केस में पुलिस प्रशासन ने एक बहुत बड़ा कदम उठाया है। मामले की गंभीरता और फैले हुए जाल को देखते हुए इसकी कमान अब विशेष जांच दल (SIT) को सौंप दी गई है। इस पांच सदस्यीय एसआईटी टीम में एक सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी), क्राइम ब्रांच प्रभारी और गंज थाना प्रभारी समेत एक्सपर्ट्स को शामिल किया गया है। यह टीम अब ड्रग सिंडिकेट, अंतरराज्यीय सप्लाई नेटवर्क और इस पूरे काले कारोबार से जुड़े हर सफेदपोश चेहरे को बेनकाब करने का काम करेगी।
क्या है पूरा मामला? (कैसे हत्थे चढ़ी ‘ड्रग्स क्वीन’) इस पूरे मामले का भंडाफोड़ 23 अगस्त 2025 को हुआ था। एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट (ACCU) और गंज थाना पुलिस की संयुक्त टीम ने देवेंद्र नगर ओवरब्रिज के पास घेराबंदी कर एक सोनेट कार (CG 04 QJ 5466) को रोका था। कार की तलाशी में 27.58 ग्राम कीमती MDMA ड्रग्स, 85,300 रुपये नगद और 5 मोबाइल फोन बरामद किए गए।
मौके से पुलिस ने तीन आरोपियों को दबोचा:
-
हर्ष आहूजा (उम्र 23 वर्ष, निवासी रायपुर)
-
मोनू विश्नोई (उम्र 29 वर्ष, निवासी हिसार, हरियाणा)
-
दीप धनोरिया (उम्र 41 वर्ष, निवासी रायपुर)
पकड़े गए आरोपियों से सख्ती से पूछताछ में मिले इनपुट के आधार पर पुलिस ने सीधे मुंबई में दबिश दी और वहां से मुख्य आरोपी नव्या मलिक को गिरफ्तार किया। जांच में सामने आया कि नव्या रायपुर के वीआईपी और हाईप्रोफाइल सर्किलों, निजी आयोजनों और नाइट क्लबों में आयोजित होने वाली ‘टेक्नो पार्टियों’ में स्वयं मौजूद रहकर एमडीएमए ड्रग्स की सप्लाई चेन संभालती थी।
चार्जशीट में सामने आए रईसजादों के नाम पुलिस द्वारा कोर्ट में पेश की गई चार्जशीट के अनुसार, यह पूरा नेटवर्क बेहद शातिर तरीके से मोबाइल और डिजिटल माध्यमों से ऑपरेट हो रहा था। चार्जशीट में खुलासा हुआ है कि आरोपी मोनू बिश्नोई के जरिए शहर के कई बड़े नामों जैसे ऋषिराज टंडन और विधि अग्रवाल समेत अन्य लोगों तक ड्रग्स पहुंचाई गई थी। वहीं, ड्रग्स की खेप के बदले मोहित ईशरानी द्वारा मोटी रकम का भुगतान किए जाने की बात भी तकनीकी जांच में साबित हुई है।
दो चरणों में होगी SIT की ‘सर्जरी’, इन 9 बिंदुओं पर फोकस: प्रशासन के मुताबिक, एसआईटी अब इस गिरोह के खिलाफ दो चरणों में चौतरफा कार्रवाई करेगी:
-
चरण 1: ड्रग्स के मूल स्रोत (Source), मनी ट्रेल (पैसों का लेनदेन), नव्या की भूमिका और स्थानीय हाईप्रोफाइल पार्टियों के कनेक्शन की बारीकी से जांच।
-
चरण 2: अंतरराज्यीय कनेक्शन, इस सिंडिकेट को पर्दे के पीछे से मिलने वाला राजनीतिक या रसूखदारों का संरक्षण, डिजिटल फॉरेंसिक जांच और ड्रग्स खरीदने वाले रईस उपभोक्ताओं की पहचान।
जांच के मुख्य 9 बिंदु:
-
एमडीएमए का मूल स्रोत: ड्रग्स आखिर मुंबई या किस अन्य देश/राज्य से रायपुर आ रही थी।
-
सप्लाई नेटवर्क: सप्लायर, कूरियर और इसे रिसीव करने वाले स्थानीय एजेंटों की कड़ियां।
-
मनी ट्रेल की पड़ताल: बैंक खाते, यूपीआई (UPI) और नकद लेनदेन का पूरा ब्योरा।
-
डिजिटल फॉरेंसिक: मोबाइल, लैपटॉप, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और व्हाट्सएप चैट का बारीकी से विश्लेषण।
-
रसूखदारों का संरक्षण: क्या किसी बड़े कारोबारी या प्रभावशाली व्यक्ति ने इस नेटवर्क को आर्थिक मदद या संरक्षण दिया है?
ED की एंट्री से बढ़ा हड़कंप यह मामला अब केवल नशीले पदार्थों की जब्ती तक ही सीमित नहीं रह गया है। इस रैकेट में हुए करोड़ों के अवैध टर्नओवर की जांच केंद्रीय एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी मनी लॉन्ड्रिंग के तहत अलग से कर रही है। ऐसे में एसआईटी और ईडी की दोहरी कार्रवाई से रायपुर के ड्रग सिंडिकेट और उससे जुड़े रईसजादों में हड़कंप मचा हुआ है।
