Nakti Village Raipur Case : मंत्री केदार कश्यप का कांग्रेस पर बड़ा हमला, कहा— ‘जमीन आवंटन और कब्जा हटाने की प्रक्रिया भूपेश सरकार में हुई शुरू

Nakti Village Raipur Case :

रायपुर। राजधानी के नकटी गांव भू-आबंटन मामले को लेकर छत्तीसगढ़ में सियासी पारा चढ़ गया है। कांग्रेस द्वारा लगाए जा रहे आरोपों पर पलटवार करते हुए साय सरकार के वन एवं सहकारिता मंत्री केदार कश्यप ने एक बड़ा खुलासा किया है। भाजपा कार्यालय एकात्म परिसर में आयोजित प्रेस वार्ता में मंत्री कश्यप ने दस्तावेजों का हवाला देते हुए कहा कि नकटी गांव में जमीन आवंटन और विस्थापन की पूरी प्रक्रिया कांग्रेस के शासनकाल में ही शुरू हुई थी, लेकिन अब कांग्रेस भ्रम फैलाकर लोगों को भड़काने का ‘घिनौना कृत्य’ कर रही है।

इस पत्रकार वार्ता में उनके साथ भाजपा प्रदेश महामंत्री अखिलेश सोनी और प्रवक्ता गौरीशंकर श्रीवास भी मौजूद रहे।

तारीखों से समझिए नकटी गांव का सच: मंत्री केदार कश्यप का दावा

मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि कांग्रेस आज सरकार पर लांछन लगा रही है, लेकिन उसे अपने गिरेबान में झांकना चाहिए। यह प्रकरण आज का नहीं बल्कि साल 2020 का है:

  • 1 सितंबर 2020: तत्कालीन कांग्रेस सरकार के समय 15.47 हेक्टेयर भूमि आबंटन की मांग की गई और प्रक्रिया आगे बढ़ी।

  • 9 नवंबर 2020: जिला प्रशासन द्वारा इस जमीन को लेकर आपत्तियां आमंत्रित की गईं।

  • 4 फरवरी 2021: सभी सरकारी विभागों से राय मांगी गई, लेकिन किसी भी विभाग ने कोई आपत्ति दर्ज नहीं कराई।

  • 26 जून 2021: आधिकारिक तौर पर उल्लेख किया गया कि उक्त भूमि आबंटन के लिए प्रस्तावित है।

“जब पूरी प्रक्रिया कांग्रेस सरकार के दौरान तय हुई, कब्जा हटाने की कार्रवाई भी उन्हीं के समय शुरू हुई, तो आज साय सरकार पर आरोप लगाना पूरी तरह निराधार और हास्यास्पद है।” — केदार कश्यप, वन एवं सहकारिता मंत्री

3 हेक्टेयर से 15 हेक्टेयर तक बढ़ा अतिक्रमण, कांग्रेस ने किया भड़काने का काम

मंत्री ने बताया कि चिन्हांकन की कार्रवाई के बाद वहां अतिक्रमण की रफ्तार तेजी से बढ़ी और वह 3 हेक्टेयर से बढ़कर 15 हेक्टेयर तक पहुंच गया। जब जिला प्रशासन ने कानून के मुताबिक (विधि सम्मत) कार्रवाई करने की कोशिश की, तो मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने वहां राजनीतिक रोटियां सेकने के लिए लोगों को भड़काना शुरू कर दिया और धरना-प्रदर्शन का असफल प्रयास किया।

भूपेश सरकार बनाम साय सरकार: विस्थापन नीति पर घेरा

केदार कश्यप ने कांग्रेस को उनका कार्यकाल याद दिलाते हुए दो मामलों की तुलना की:

  1. सेरीखेड़ी का मामला (भूपेश सरकार): तत्कालीन बघेल सरकार के समय सेरीखेड़ी में लगभग 150 परिवारों को बलपूर्वक खदेड़ दिया गया था। उस समय न तो किसी का पुनर्वास किया गया और न ही कोई वैकल्पिक व्यवस्था दी गई।

  2. नकटी का मामला (विष्णुदेव साय सरकार): इसके विपरीत, वर्तमान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने संवेदनशीलता और मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए नकटी के प्रभावित परिवारों को नया रायपुर में पक्के आवास उपलब्ध कराए हैं। सरकार ने न सिर्फ उन्हें मकानों की चाबियां सौंपी, बल्कि सम्मानपूर्वक नए घरों तक शिफ्ट भी कराया।

क्या वहां विधायकों का आवास बनेगा?

कांग्रेस के इस आरोप पर कि वहां विधायकों के लिए बंगले बनेंगे, मंत्री ने स्थिति साफ करते हुए कहा कि यह भूमि हाउसिंग बोर्ड (Housing Board) के लिए प्रस्तावित की गई है। अब उस जमीन का उपयोग किस रूप में किया जाएगा, इसका अंतिम फैसला हाउसिंग बोर्ड ही तय करेगा। उन्होंने दोहराया कि साय सरकार की नीति पूरी तरह स्पष्ट है— प्रदेश के किसी भी गरीब के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा।

शेयर करें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *