रायपुर: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा है कि ‘दीदी के गोठ’ कार्यक्रम प्रदेश की माताओं-बहनों के लिए प्रेरणा का एक सशक्त माध्यम बन गया है। इस कार्यक्रम के जरिए महिलाओं को आत्मनिर्भरता, आजीविका, नवाचार और स्वरोजगार से जुड़ी अत्यंत रोचक एवं प्रेरक जानकारियां मिल रही हैं। एक सफल दीदी की कहानी हजारों अन्य महिलाओं को आगे बढ़ने की राह दिखा रही है और यही इस कार्यक्रम की सबसे बड़ी सफलता है।
यह बातें मुख्यमंत्री ने आज राजधानी रायपुर के पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में आयोजित ‘दीदी के गोठ वार्षिकोत्सव-2026’ एवं संकुल स्तरीय संगठन सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहीं।
इन प्रमुख पुस्तकों और पत्रिकाओं का हुआ विमोचन
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण विकास से जुड़ी महत्वपूर्ण कड़ियों का विमोचन किया, जिसमें शामिल हैं:
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दीदी के गोठ कॉफी टेबल बुक
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बिहान वाणी (त्रैमासिक पत्रिका)
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मोर गांव मोर पानी (पुस्तक)
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर अपनी सफलता की कहानी साझा करने वाली दीदियों को सम्मानित किया तथा ‘दीदी के गोठ’ के अब तक के 12 एपिसोड पर आधारित प्रदर्शनी और फोटो गैलरी का अवलोकन कर स्व-सहायता समूहों की महिलाओं से सीधा संवाद किया।
वर्चुअल जुड़ीं दुर्ग की ‘लखपति दीदी’ विद्या निषाद, CM ने की सराहना
कार्यक्रम में एक भावुक और प्रेरक क्षण तब आया जब मुख्यमंत्री ने दुर्ग जिले से वर्चुअल माध्यम से जुड़ीं लखपति दीदी विद्या निषाद से चर्चा की।
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संघर्ष की कहानी: विद्या निषाद ने बताया कि कोरोना काल में पति के निधन के बाद वे संकट में थीं, लेकिन उन्हें ‘बिहान’ समूह से प्रशिक्षण एवं मार्गदर्शन मिला।
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आत्मनिर्भरता की उड़ान: इसके बाद उन्होंने कपड़े एवं फैंसी स्टोर का व्यवसाय शुरू किया। आज वे प्रतिवर्ष 5 लाख रुपये से अधिक की आय अर्जित कर पूरी तरह आत्मनिर्भर बन चुकी हैं। मुख्यमंत्री ने उनके इस जज्बे की सराहना करते हुए उन्हें उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।
हर माह के दूसरे गुरुवार को गूंजती है सफलता की कहानी मुख्यमंत्री साय ने बताया कि ‘दीदी के गोठ’ ने एक वर्ष का सफल सफर पूरा कर लिया है और अब तक इसके 12 एपिसोड प्रसारित हो चुके हैं। प्रत्येक माह के दूसरे गुरुवार को एक सफल दीदी अपनी संघर्ष एवं सफलता की कहानी स्वयं अपनी बोली (स्थानीय भाषा) में साझा करती है, जिससे प्रदेशभर की महिलाओं को नई दिशा और प्रेरणा मिलती है।
“ड्रोन दीदी से लेकर राजमिस्त्री तक… अब करोड़पति बनने की बारी”
वेदों के श्लोक ‘यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता’ का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय संस्कृति में नारी को देवी स्वरूप माना गया है। आज छत्तीसगढ़ की महिलाएं ‘बिहान’ योजना से जुड़कर आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं।
आज प्रदेश की बेटियां और महिलाएं:
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ड्रोन दीदी के रूप में तकनीक संभाल रही हैं।
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राजमिस्त्री बनकर निर्माण कार्यों की कमान संभाल रही हैं।
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ऑर्गेनिक खेती, सेटरिंग प्लेट निर्माण, पशुपालन और अन्य आजीविका गतिविधियों से परिवार को मजबूत कर रही हैं।
मुख्यमंत्री ने विश्वास जताते हुए कहा कि आज की ये लखपति दीदियां आने वाले समय में करोड़पति बनने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं और ‘विकसित भारत’ तथा ‘विकसित छत्तीसगढ़’ के निर्माण में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
