रायपुर | छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र का पहला दिन पूरी तरह से हंगामे की भेंट चढ़ गया। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष (कांग्रेस) ने राम मंदिर चंदा मामले, प्रदेश में बढ़ते अपराध और नशे के कारोबार को लेकर जोरदार हंगामा और नारेबाजी की। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच हुई तीखी बहस के कारण सदन की कार्यवाही को बार-बार रोकना पड़ा।
राम मंदिर निर्माण के नाम पर करोड़ों रुपये के चंदे में गड़बड़ी के आरोपों को लेकर दोनों दल आमने-सामने आ गए, जिससे पहले ही दिन सदन का पारा चढ़ गया।
भूपेश बघेल ने दिखाई 1.21 लाख की रसीद, महंत बोले- छत्तीसगढ़ियों की आस्था का मामला
इस पूरे विवाद को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने सरकार को घेरा:
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दान की रसीद दिखाई: पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने मीडिया के सामने 1 लाख 21 हजार रुपये के दान की रसीद दिखाई और आरोप लगाया कि छत्तीसगढ़ से राम मंदिर निर्माण के नाम पर करोड़ों का चंदा लिया गया है, जिसकी सच्चाई सामने आनी चाहिए।
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नेता प्रतिपक्ष का तर्क: डॉ. चरणदास महंत ने कहा कि जब इस सदन से राम मंदिर निर्माण पर ‘धन्यवाद प्रस्ताव’ पारित किया जा सकता है, तो मंदिर से जुड़े मुद्दों और चंदे पर चर्चा क्यों नहीं हो सकती? छत्तीसगढ़ के लोगों और विधायकों ने अपनी श्रद्धा से करोड़ों का चंदा दिया है। चूंकि भगवान राम का छत्तीसगढ़ (ननिहाल) से विशेष संबंध है, इसलिए यह सीधे तौर पर जनता की आस्था से जुड़ा विषय है।
डिप्टी सीएम अरुण साव का पलटवार: “यूपी का मामला यहाँ उठाकर समय बर्बाद कर रही कांग्रेस”
कांग्रेस के इस आक्रामक रुख पर उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने करारा पलटवार किया। उन्होंने विपक्ष पर सदन की कार्यवाही को जानबूझकर बाधित करने का आरोप लगाया:
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छत्तीसगढ़ से संबंध नहीं: अरुण साव ने कहा कि जिस राम मंदिर चंदे या चोरी का मुद्दा कांग्रेस उठा रही है, वह उत्तर प्रदेश का मामला है। इसका छत्तीसगढ़ विधानसभा से कोई सीधा संबंध नहीं है।
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जनता के पैसे का दुरुपयोग: डिप्टी सीएम ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सिर्फ हेडलाइंस में रहने और मूल मुद्दों से जनता का ध्यान भटकाने के लिए सदन के कीमती समय और जनता के पैसे का दुरुपयोग कर रही है। उन्होंने कांग्रेस के पिछले 5 साल के कार्यकाल की याद दिलाते हुए विपक्ष को घेरा।
नशे और बढ़ते अपराध पर भी सरकार को घेरा
राम मंदिर विवाद के अलावा कांग्रेस विधायकों ने प्रदेश की कानून व्यवस्था को लेकर भी सदन में नारेबाजी की। विपक्ष ने आरोप लगाया कि राज्य में नशे का कारोबार और अपराध का ग्राफ तेजी से बढ़ रहा है, जिस पर सरकार लगाम लगाने में नाकाम साबित हुई है।
आरोप-प्रत्यारोप के इस दौर के बीच मानसून सत्र का पहला दिन बिना किसी बड़ी विधायी चर्चा के समाप्त हो गया। अब देखना होगा कि आने वाले दिनों में सदन में जनता से जुड़े मुद्दों पर बात होती है या यह सियासी टकराव इसी तरह जारी रहता है।
