रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन सदन में भ्रष्टाचार और फिजूलखर्ची का मुद्दा गरमाया रहा। प्रश्नकाल के दौरान कांग्रेस विधायक अटल श्रीवास्तव ने सरकारी आयोजनों में टेंट, लाइट और साउंड सिस्टम के भुगतान में भारी गड़बड़ी और भ्रष्टाचार का आरोप लगाया। इस मामले में तीखी बहस के बाद विभागीय मंत्री अरुण साव ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की घोषणा की है।
‘जो कार्यक्रम हुआ ही नहीं, उसका भी भुगतान हो गया’ – विधायक अटल श्रीवास्तव
कांग्रेस विधायक अटल श्रीवास्तव ने सदन में दस्तावेजों का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि सरकारी विभागों में खर्चों को बेतहाशा बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया जा रहा है। उन्होंने एक गंभीर खुलासा करते हुए कहा, “प्रदेश में ऐसे कार्यक्रमों के बिल भी जमा कर भुगतान ले लिया गया, जो असल में कभी आयोजित ही नहीं हुए।”
कलेक्टर के प्रोग्राम में 3 लाख, कृषक कार्यक्रम में 13 लाख का बिल!
विधायक अटल श्रीवास्तव ने खर्चों में असमानता को उजागर करते हुए आंकड़ों के साथ सरकार को घेरा। उन्होंने पूछा कि जब कलेक्टर के सामान्य कार्यक्रम में साउंड सिस्टम के लिए 3 लाख रुपये का भुगतान किया जाता है, तो वहीं दूसरी तरफ कृषक कार्यक्रम में इसी काम के लिए 13 लाख रुपये का भारी-भरकम भुगतान कैसे हो गया? उन्होंने इस बड़े अंतर पर सवाल उठाते हुए मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की।
मंत्री अरुण साव ने दी मंजूरी, जल जीवन मिशन की भी होगी जांच
विपक्ष के इन गंभीर आरोपों पर संज्ञान लेते हुए उपमुख्यमंत्री और विभागीय मंत्री अरुण साव ने सदन में ही इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने का ऐलान किया।
गौरतलब है कि इससे ठीक पहले प्रश्नकाल की शुरुआत में भाजपा विधायक भईया लाल राजवाड़े ने भी जल जीवन मिशन के तहत पाइपलाइन बिछाने और पानी टंकियों के निर्माण में गड़बड़ी का मुद्दा उठाया था। उस मामले में भी सरकार ने जांच कराने की घोषणा की है। टेंट और साउंड सिस्टम घोटाले की जांच के इस फैसले के बाद सदन में इस मुद्दे पर जारी गतिरोध शांत हुआ।
