रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र में सक्ती जिले के सिंधी तराई स्थित वेदांता प्लांट में हुए भीषण हादसे का मुद्दा भारी हंगामे के साथ उठा। इस दर्दनाक हादसे में 25 लोगों की जान जा चुकी है। इसी को लेकर मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने सदन में सरकार को चौतरफा घेरा। मामले की जांच, एफआईआर और अब तक आरोपियों की गिरफ्तारी न होने पर तीखे सवाल दागते हुए कांग्रेस विधायकों ने सदन से बहिर्गमन (वॉकआउट) कर दिया।
’18 पर FIR, तो चेयरमैन अनिल अग्रवाल बाहर क्यों?’ – नेता प्रतिपक्ष
नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने इस मामले को उठाते हुए सीधे वेदांता समूह के शीर्ष प्रबंधन पर सवाल खड़े किए। उन्होंने पूछा कि जब एफआईआर में वेदांता समूह के चेयरमैन अनिल अग्रवाल का नाम दर्ज है, तो पुलिस ने अब तक उन्हें गिरफ्तार क्यों नहीं किया?
महंत ने कहा कि 18 लोगों के खिलाफ अपराध दर्ज होने के बाद भी पुलिस के हाथ खाली हैं। उन्होंने जांच की निष्पक्षता पर संदेह जताते हुए पूछा कि क्या चेयरमैन को कोई समन भी जारी किया गया है? नेता प्रतिपक्ष ने आशंका जताई कि कहीं इस मामले की विवेचना में कोई अंदरूनी लेन-देन तो नहीं चल रहा है।
पूर्व सीएम बघेल और विधायक रामकुमार यादव ने भी घेरा
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भूपेश बघेल के तीखे सवाल: पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने औद्योगिक हादसों में जवाबदेही का मुद्दा उठाया। उन्होंने पूछा कि प्रदेश के औद्योगिक हादसों में अब तक कितने मालिकों पर एफआईआर हुई है? कोरबा के एक पुराने हादसे का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि तब चेयरमैन पर एफआईआर नहीं हुई थी, लेकिन इस बार नाम शामिल होने के बाद भी कार्रवाई रुकी हुई है।
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मुआवजे पर उठाए सवाल: चंद्रपुर विधायक रामकुमार यादव ने आरोप लगाया कि केंद्र और राज्य सरकार द्वारा घोषित आर्थिक सहायता अभी तक कई पीड़ित परिवारों तक नहीं पहुंची है। उन्होंने भी आरोपियों की गिरफ्तारी में जानबूझकर देरी करने का आरोप लगाया।
दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा, मृतकों के परिजनों को ₹35-35 लाख मिले: उद्योग मंत्री
विपक्ष के भारी वॉकआउट और आरोपों के बीच उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन ने सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने विपक्ष के दावों को खारिज करते हुए कहा कि मामले की विवेचना लगातार जारी है और सरकार दोषियों को किसी भी कीमत पर नहीं बख्शेगी।
मंत्री ने सदन में ये आंकड़े और जानकारियां रखीं:
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हादसे की जांच के लिए एक विशेष समिति का गठन किया गया है।
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वेदांता कंपनी की तरफ से मृतकों के परिजनों को 35-35 लाख रुपये की सहायता राशि दी जा चुकी है।
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प्रधानमंत्री राहत कोष से 2-2 लाख रुपये का वितरण किया गया है।
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मुख्यमंत्री सहायता राशि का वितरण भी जिला प्रशासन के माध्यम से तेजी से चल रहा है।
उद्योग मंत्री ने सदन को आश्वस्त किया कि जैसे ही जांच पूरी होगी, सभी दोषियों पर सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, सरकार के इस जवाब से असंतुष्ट होकर कांग्रेस सदस्यों ने सदन छोड़ दिया।
