संसद के मॉनसून सत्र (20 जुलाई 2026 – 13 अगस्त 2026) के दौरान लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा। नई दिल्ली स्थित संसद भवन से दिए अपने संबोधन में उन्होंने दिल्ली में छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई और लाठीचार्ज के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। इस दौरान सीजेपी प्रदर्शन के दौरान छात्रों के साथ हुए प्रशासनिक व्यवहार को लेकर विपक्ष ने सरकार को घेरा और केंद्रीय गृह मंत्री के आधिकारिक बयान की मांग की।
छात्रा से बातचीत का दिया हवाला: युवाओं की सोच और लोकतांत्रिक भागीदारी
सदन को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने अपने भाषण की शुरुआत युवाओं की सोच, उनके दृष्टिकोण और लोकतांत्रिक भागीदारी के महत्व से की। उन्होंने एक छात्रा से हुई अपनी हालिया बातचीत का संदर्भ देते हुए कहा, “छात्र वह होता है जिसका दिमाग और दिल हमेशा खुला रहता है।” उन्होंने स्पष्ट किया कि एक सच्चा छात्र वही है जो नया सीखने के लिए तैयार रहता है, यह स्वीकार करता है कि उसे सब कुछ नहीं पता, और विनम्रता को ही अपना सबसे बड़ा गुण मानता है।
तीन श्रेणियों में बांटा: छात्र, ईडियट और अंधभक्त
सार्वजनिक जीवन में बनाई जाने वाली आभासी छवियों (इमेजेस) पर तंज कसते हुए राहुल गांधी ने छात्रा से हुई बातचीत के आधार पर तीन वर्गों का विवरण दिया:
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पहला वर्ग – छात्र: जो सच्चाई को अपने सीने पर गर्व से लेकर घूमता है और सीखने के लिए तत्पर रहता है।
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दूसरा वर्ग – ईडियट: जिसे अपनी सच्चाई छिपाने के लिए एक बड़ी छवि (इमेज) का सहारा लेना पड़ता है, क्योंकि वह यह दिखावा करने की कोशिश करता है कि वह भगवान है।
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तीसरा वर्ग – अंधभक्त: छात्रा के अनुसार, अंधभक्त वह है जिसे पूरी तरह से यह भरोसा हो जाता है कि दूसरा ‘ईडियट’ ही भगवान है।
सदन में जोरदार हंगामा: आपत्तिजनक शब्दों को हटाने की मांग
राहुल गांधी की इस टिप्पणी के बाद लोकसभा में भारी हंगामा शुरू हो गया। सत्ता पक्ष के सांसदों ने इस वक्तव्य पर कड़ा विरोध जताया और संसदीय मर्यादा का हवाला देते हुए ‘ईडियट’ जैसे शब्दों को संसद की कार्यवाही से हटाने का औपचारिक अनुरोध पीठ (स्पीकर) से किया। लगातार हो रहे हंगामे और गतिरोध के कारण मॉनसून सत्र की कार्यवाही प्रभावित हो रही है।
पेपर लीक बिल vs विपक्षी विरोध: 19 बैठकों वाले सत्र में बना गतिरोध
20 जुलाई से 13 अगस्त 2026 तक प्रस्तावित इस मॉनसून सत्र में कुल 19 बैठकें होनी हैं। पूर्व के सत्रों की तरह इस बार भी प्रतियोगी परीक्षाओं, सार्वजनिक छात्र आंदोलनों और पेपर लीक जैसे ज्वलंत मुद्दों पर सरकार और विपक्ष आमने-सामने हैं।
एक तरफ जहां सरकार सदन में ‘पब्लिक एग्जामिनेशंस (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) अमेंडमेंट बिल 2026’ पर चर्चा करा रही है—जिसमें धांधली और पेपर लीक के दोषियों के लिए 5 से 10 साल की सख्त जेल और भारी जुर्माने का कड़ा प्रावधान है—वहीं दूसरी तरफ विपक्ष छात्रों पर हुई प्रशासनिक सख्ती और दिल्ली पुलिस की कार्रवाई को लेकर सरकार से जवाब मांग रहा है।
