नई दिल्ली / नोएडा | दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करने के मामले में एक बड़ा मोड़ आया है। मामले की मुख्य आरोपी रुचिका सिंह का एक माफीनामा वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है, जिसमें वह हाथ जोड़कर पूरे देश से माफी मांगती दिख रही है।
‘भीड़ के बहकावे में हुई गलती’ – रुचिका सिंह
वायरल वीडियो में रुचिका सिंह ने खुद को 15 वर्ष की नाबालिग बताते हुए कहा:
-
वह अपने दोस्तों के साथ कनॉट प्लेस घूमने गई थी, जहाँ से वह जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शन में पहुँच गई।
-
वहाँ मौजूद भीड़ और लोगों के प्रभाव में आकर उसने पीएम मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग किया।
-
रुचिका ने स्वीकार किया कि उसकी टिप्पणी माफी के योग्य नहीं है, लेकिन इसे अपनी “पहली और आखिरी गलती” मानते हुए उसने पूरे देश से शर्मिंदगी जताई और भविष्य में ऐसा न करने का वादा किया।
🕊️ पीएम मोदी ने कहा – ‘युवाओं को सीखने का मौका मिले’
यह माफीनामा वीडियो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस इंस्टाग्राम बयान के कुछ घंटों बाद सामने आया, जिसमें उन्होंने कहा था कि उन्होंने प्रदर्शन के दौरान गाली देने वाले छात्रों को माफ कर दिया है।
“मेरे और मेरी दिवंगत मां के खिलाफ इस्तेमाल किए गए शब्द परेशान करने वाले थे, लेकिन युवाओं को अपनी गलतियों से सीखने का अवसर मिलना चाहिए।” — पीएम नरेंद्र मोदी
पुलिस कार्रवाई और Zero FIR
-
जीरो एफआईआर दर्ज: 29 जुलाई को नोएडा के एक्सप्रेसवे थाने में रुचिका के खिलाफ संवैधानिक पद की गरिमा को ठेस पहुँचाने और माहौल बिगाड़ने के आरोप में Zero FIR दर्ज की गई थी।
-
दिल्ली ट्रांसफर हुआ केस: भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं के तहत दर्ज इस मामले को आगे की कार्रवाई के लिए दिल्ली के पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने भेज दिया गया है।
-
फ्लैट पर ताला: नोएडा स्थित सोसाइटी में रुचिका अपनी माँ के साथ रहती थी, लेकिन प्रदर्शन के बाद से उसका फ्लैट बंद है। पुलिस स्थानीय लोगों से पूछताछ कर रही है।
‘अपराधिक केस अभिव्यक्ति की आजादी पर असर’ – आयोजक
प्रदर्शन आयोजित करने वाली ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के प्रवक्ता सौरव दास ने एफआईआर दर्ज किए जाने पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा:
-
आपत्तिजनक भाषा का समर्थन नहीं किया जा सकता, लेकिन ऐसे बयानों पर सीधे आपराधिक मुकदमा दर्ज करना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता (Freedom of Speech) को प्रभावित करता है।
-
यदि किसी को आपत्ति थी तो मानहानि का मामला दर्ज किया जा सकता था, आपराधिक कार्रवाई सही नहीं है।
